मेट गाला में राजस्थानी शाही जोड़ी का डेब्यू

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 05-05-2026
Who are Princess Gauravi Kumari and Sawai Padmanabh Singh? Jaipur royals’ Met Gala debut
Who are Princess Gauravi Kumari and Sawai Padmanabh Singh? Jaipur royals’ Met Gala debut

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली 

राजकुमारी गौरवी कुमारी और सवाई पद्मनाभ सिंह ने हाल ही में मेट गाला में राजस्थानी परंपराओं से प्रेरित शानदार परिधानों में डेब्यू किया, जिसके बाद उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इस उपस्थिति के बाद जयपुर के शाही परिवार से जुड़े इन दोनों चेहरों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और लोग उनके जीवन, शिक्षा और कार्यों के बारे में अधिक जानने में रुचि दिखा रहे हैं।

राजकुमारी गौरवी कुमारी ने हार्पर्स बाज़ार को दिए एक इंटरव्यू में अपने परिवार की महिलाओं की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं रहस्यमयी महिलाओं के परिवार से आती हूँ—महारानी गायत्री देवी से लेकर मेरी दादी, जयपुर की राजमाता पद्मिनी देवी तक, और मेरी माँ, राजकुमारी दीया कुमारी तक, जो वर्तमान में राजस्थान की उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं।” उनके अनुसार यह विरासत उनके व्यक्तित्व और सोच पर गहरा प्रभाव डालती है।

 

 

उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल के मुताबिक, उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मेयो कॉलेज गर्ल्स स्कूल से पूरी की और आगे की उच्च शिक्षा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से हासिल की। वर्तमान में वह राजकुमारी दीया कुमारी फाउंडेशन के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालती हैं और ‘द PDKF स्टोर’ की सह-संस्थापक भी हैं।

राजकुमारी गौरवी अपने सादगीपूर्ण स्टाइल के लिए भी जानी जाती हैं, जिसमें हल्का और न्यूनतम मेकअप शामिल होता है। यह उनका सिग्नेचर लुक माना जाता है, जिसे उन्होंने मेट गाला जैसे वैश्विक मंच पर भी बरकरार रखा। रेड कार्पेट इवेंट के लिए उन्होंने मशहूर डिजाइनर प्रबल गुरुंग का गाउन चुना, जिसमें विशेष रूप से उनकी दादी महारानी गायत्री देवी की गुलाबी शिफॉन साड़ी के कपड़े और तत्वों का उपयोग किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने जयपुर के मोतियों और बिना तराशे हीरों से अपने लुक को पूरा किया, जिससे उनका परिधान और अधिक शाही और पारंपरिक दिखा।

अपने इस परिधान के बारे में बात करते हुए उन्होंने वोग इंडिया को बताया, “यह ज़रूरी था कि मेरी दादी की साड़ी सिर्फ प्रेरणा का स्रोत न हो, बल्कि उसे पोशाक में किसी सार्थक तरीके से शामिल भी किया जाए।” उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए यह सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं बल्कि विरासत को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास था।

दूसरी ओर, सवाई पद्मनाभ सिंह, जो जयपुर के शाही परिवार के मुखिया हैं और जिन्हें परिवार और मित्र स्नेह से ‘पाचो’ कहकर बुलाते हैं, भी इस वैश्विक मंच पर अपने स्टाइल और व्यक्तित्व के कारण चर्चा में रहे। अपने पूर्वजों की तरह वह भी एक कुशल पोलो खिलाड़ी हैं और उन्होंने इस खेल में कई पुरस्कार हासिल किए हैं।

सवाई पद्मनाभ सिंह महिलाओं के सशक्तिकरण के भी प्रबल समर्थक हैं। वे जरूरतमंद लड़कियों को छात्रवृत्ति प्रदान करने, डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और शिक्षा के क्षेत्र में सहायता देने जैसे कार्यों से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, वे जयपुर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

उनकी पहचान केवल एक खिलाड़ी या शाही व्यक्तित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक स्टाइल आइकन के रूप में भी देखे जाते हैं, जो अक्सर ऐसे परिधानों में नजर आते हैं जो परंपरा और आधुनिकता का संतुलन दर्शाते हैं।

मेट गाला में उनके परिधान का मुख्य आकर्षण ‘फुलघर कोट’ रहा, जिसे प्रबल गुरुंग ने डिजाइन किया था। यह गहरे रंग के मखमल से तैयार किया गया था और इस पर की गई आरी और जरदोज़ी कढ़ाई में 600 घंटे से अधिक का समय लगा। यह परिधान कारीगरी और धैर्य का बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है।

 

अपने इस लुक पर बात करते हुए सवाई पद्मनाभ सिंह ने वोग इंडिया से कहा कि उनका उद्देश्य राजस्थानी कारीगरी को इस तरह प्रस्तुत करना था जो उन्हें वास्तविक और स्वाभाविक लगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह डिजाइन एक अधिक भव्य और प्रभावशाली शैली को दर्शाता है, साथ ही राजस्थानी परंपरा की गहराई से भी जुड़ा हुआ है।