नई दिल्ली
सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ ने 20 जुलाई को CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होना चाहिए था और अधिकारियों से उनकी मांगों को सुनने की अपील की।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में दिलजीत ने लिखा, "आज जो हुआ बहुत बुरा हुआ... छात्रों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अनुरोध करता हूं कि छात्रों की मांगों को सुन लिया जाए। लोगों की आवाज़ रब की आवाज़ होती है।"
उन्होंने आगे कहा, "मुझ पर पहले भी कई बार एंटी-नेशनल का टैग लगाया जा चुका है। अब भी मुझे एंटी-नेशनल कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी आलोचना और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं सार्वजनिक रूप से बात भी नहीं कर सकता। बाकी रब सब देख रहा है, बाबा सबका भला करेंगे।"
दिलजीत ने अपने संदेश में कहा कि छात्रों के साथ जो हुआ वह "बहुत गलत" था और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से छात्रों की मांगों पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि "जनता की आवाज़ ही ईश्वर की आवाज़ होती है।"
उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब CJP की ओर से NEET-UG 2026 पेपर लीक के आरोपों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है।
विपक्ष ने भी सोमवार को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।
फिल्म इंडस्ट्री के कई अन्य कलाकारों ने भी पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी। अभिनेता रोहित सराफ ने लिखा, "आज का दिन बेहद पीड़ादायक रहा, लेकिन मुझे एक बात पता है... सिर्फ हमारा देश ही नहीं, पूरी दुनिया सुन रही है। यह उस भविष्य की आवाज है, जो आज की अनिश्चितताओं के बावजूद बेहतर दिखता है।"
दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल पहुंचीं और छात्रों के साथ शामिल हुईं। उन्होंने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया। उन्होंने अपने पिता कैफी आजमी की कविता भी साझा की।
अभिनेता रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा ने भी संयुक्त बयान जारी कर प्रदर्शन कर रहे युवाओं का समर्थन किया और उन्हें "हमारे लोकतंत्र की धड़कन" बताया।
अदिति राव हैदरी ने लिखा, "किसी की भी राजनीतिक पसंद कुछ भी हो, मानवता सबसे ऊपर होनी चाहिए। हमें अपने छात्रों और अपनी बात रखने वाले हर व्यक्ति के लिए सम्मान, गरिमा और सहानुभूति से भरा सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना चाहिए। एक-दूसरे को सुनना ही सार्थक प्रगति की नींव है। हमारे छात्र हमारा भविष्य हैं।"
वहीं, भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने विरोध की जगह बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर कोई समस्या है तो उसे उचित तरीके से चर्चा के जरिए हल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के लिए लगातार काम कर रही है।
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी संसद के बाहर कहा कि संसद का उद्देश्य चर्चा और जवाबदेही तय करना है, न कि व्यवधान पैदा करना। उन्होंने कहा कि सरकार से किसी को हटाने या रखने का फैसला दबाव बनाकर नहीं कराया जा सकता।
कंगना ने कहा, "अगर आपको इतनी गंभीर आपत्ति है तो चुनाव लड़कर खुद सत्ता में आइए।"
इस बीच, सोनम वांगचुक अभी भी सफदरजंग अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। अस्पताल के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है, हालांकि उनका ब्लड शुगर कम है और सीरम पोटैशियम स्तर 3.2 mEq/L दर्ज किया गया है।
अस्पताल ने बताया कि उन्हें ओरल रिहाइड्रेशन थेरेपी और पोटैशियम सप्लीमेंट दिया जा रहा है, लेकिन उन्होंने चिकित्सकीय सलाह के बावजूद IV फ्लूइड और ग्लूकोज लेने से इनकार किया है।
दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन शुरू करने के बाद सोनम वांगचुक को अस्पताल पहुंचाया था।