नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव से कहा कि वह एक अच्छी फिल्म बनाएं और लोगों का फिर से मनोरंजन करें। अदालत ने कहा कि इससे उनकी छवि दोबारा बनाने में मदद मिल सकती है। यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत ने चेक बाउंस से जुड़े लंबे समय से चल रहे मामलों में राजपाल यादव की ओर से जमा कराए गए 1.15 करोड़ रुपये का संज्ञान लिया।
राजपाल यादव खुद अदालत में मौजूद थे। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने बताया कि अभिनेता ने अब तक 1.15 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि उनकी संपत्ति का एक संभावित खरीदार मिल गया है, जो 85 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट 12 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने के लिए तैयार है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव के आचरण पर असंतोष जताया। हालांकि, पीठ ने कहा कि वह अभिनेता को फिलहाल कुछ और समय दे रही है।
मुख्य न्यायाधीश ने राजपाल यादव से पूछा कि क्या उनकी कोई नई फिल्म आने वाली है। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह कोई अच्छी फिल्म बनाएं और लोगों का फिर से मनोरंजन करें। इससे उनकी छवि दोबारा बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्य न्यायाधीश ने हल्के अंदाज में यह भी कहा कि अदालत में कुछ वकील ऐसे हैं जो अच्छे अभिनेता भी हैं। राजपाल यादव उन्हें लेकर भी कोई फिल्म बना सकते हैं।अदालत की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान मौजूद राजपाल यादव के लिए एक भावनात्मक क्षण भी रही। उन्होंने अदालत के सामने अपनी आर्थिक परेशानियों और फिल्मी करियर में हुए नुकसान का जिक्र किया।
राजपाल यादव ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपने करियर में करीब 200 से 250 फिल्मों में काम किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 13 वर्षों में उन्हें करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
उन्होंने विशेष रूप से अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ का जिक्र किया। राजपाल यादव ने कहा कि इस फिल्म में उन्हें करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।अभिनेता ने अदालत से कहा कि उनकी फिल्म की रिलीज को लेकर भी मुश्किलें आईं। उनके मुताबिक, फिल्म को करीब 1,200 सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था, लेकिन वह एक भी थिएटर में रिलीज नहीं हो सकी।
राजपाल यादव ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई थी और फिल्म की रिलीज रुक गई। उन्होंने अदालत के सामने अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि फिल्म के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया गया कि राजपाल यादव की संपत्ति का संभावित खरीदार मिल गया है। खरीदार 85 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने के लिए तैयार है।
यह राशि 12 अक्टूबर तक जमा किए जाने की बात कही गई है। इससे चेक बाउंस मामलों से जुड़े आर्थिक विवाद में राजपाल यादव की ओर से भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है।
राजपाल यादव से जुड़ा यह कानूनी विवाद करीब 16 वर्ष पुराना है। मामला वर्ष 2010 में हुए एक वित्तीय समझौते से जुड़ा है।शिकायतकर्ता के अनुसार, एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने राजपाल यादव को उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये दिए थे। यह फिल्म राजपाल यादव के निर्देशन में बनी थी और बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म थी।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि वर्ष 2013 में राजपाल यादव ने आर्थिक सहायता की रकम के निपटारे के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक जारी किए। आरोप के मुताबिक, ये सभी चेक बैंक से भुगतान के बिना लौट गए।
इसके बाद चेक बाउंस के मामले अदालत में पहुंचे।
मामले से जुड़े रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2012 में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। शिकायतकर्ता का कहना था कि राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी ने ब्याज सहित करीब 11 करोड़ रुपये लौटाने पर सहमति जताई थी।
विवाद आगे बढ़ा और निचली अदालत में मामला चला। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी। बाद में यह सजा घटाकर तीन महीने कर दी गई।वर्ष 2019 में सेशन कोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
10 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई।अदालत ने दोषसिद्धि के खिलाफ याचिका दायर करने में हुई 1,894 दिनों की देरी को असाधारण बताया और इसे माफ करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को सातों शिकायतों में शिकायतकर्ता को एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि देने का निर्देश दिया था। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि अभिनेता की ओर से पहले से जमा करीब दो करोड़ रुपये की राशि को समायोजित किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने सजा को दो महीने के लिए स्थगित कर दिया था, ताकि राजपाल यादव को फैसले के खिलाफ अपीलीय अदालत का रुख करने का समय मिल सके।मामले में उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव पर भी जुर्माना लगाया गया था। हाईकोर्ट ने उन्हें प्रत्येक मामले में करीब 5.5 लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया था। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उन्हें तीन महीने की साधारण कैद भुगतने की बात कही गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को राजपाल यादव की याचिका पर नोटिस जारी किया था। अदालत ने कहा था कि यदि वह सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपये जमा करते हैं तो उन्हें आत्मसमर्पण से छूट दी जा सकती है।
इसके बाद 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने आत्मसमर्पण से मिली छूट को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था।अब राजपाल यादव की ओर से 1.15 करोड़ रुपये जमा किए जाने और 85 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि जमा किए जाने की संभावित व्यवस्था की जानकारी अदालत के सामने रखी गई है।
मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी। फिलहाल राजपाल यादव के लिए कानूनी लड़ाई के साथ आर्थिक दायित्वों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की फिल्म बनाने और दर्शकों का मनोरंजन करने वाली टिप्पणी ने गंभीर कानूनी कार्यवाही के बीच एक अलग ही माहौल पैदा कर दिया।