आवाज़ द वॉयस / नई दिल्ली
ताज महल केवल संगमरमर से गढ़ा गया एक स्थापत्य चमत्कार नहीं है, बल्कि वह शाश्वत भावना है, जो सदियों से मानव सभ्यता की चेतना में धड़कती चली आई है। यह प्रेम, समर्पण और त्याग की वह अमर गाथा है, जिसने समय की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया को अपने सौंदर्य और संवेदना से बाँध लिया है। इसी कालातीत प्रेम की आत्मा को सिनेमा के विराट कैनवास पर साकार करने का स्वप्न फ़िल्मकार अकबर ख़ान ने वर्षों पहले देखा था। आज वह स्वप्न एक सशक्त यथार्थ बनकर वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उनकी ऐतिहासिक महाकाव्य फ़िल्म ‘ताज महल: एन इटरनल लव स्टोरी’ अब भारत की सीमाओं से आगे निकलकर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का प्रभावशाली माध्यम बनती जा रही है।

इस वैश्विक यात्रा का औपचारिक आरंभ 6 फरवरी 2026 को मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में होने वाले वर्ल्ड गाला प्रीमियर से होगा, लेकिन उससे पहले ही फ़िल्म ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में गहरी छाप छोड़नी शुरू कर दी है।
इसी क्रम में कुआलालंपुर में आयोजित एक विशेष निजी स्क्रीनिंग ने फ़िल्म की वैश्विक पहचान को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। यह प्रदर्शन केवल एक सिनेमाई आयोजन नहीं था, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण बन गया, क्योंकि यह स्क्रीनिंग मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर बिन इब्राहिम के सम्मान में आयोजित की गई थी।
इस विशिष्ट अवसर पर विभिन्न देशों के उच्चायुक्तों, राजदूतों, वरिष्ठ राजनयिकों, सांस्कृतिक प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक गरिमा से भर दिया। जब परदे पर शाहजहाँ और मुमताज़ महल की अमर प्रेम कथा जीवंत हुई, तो सभागार में मौजूद दर्शक केवल दर्शक नहीं रहे, बल्कि उस भावना के सहभागी बन गए, जिसने ताज महल को जन्म दिया। फ़िल्म को मिली भावपूर्ण और आत्मीय सराहना ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह कथा किसी एक देश या संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सार्वभौमिक अनुभूति है, जो हर इंसान के हृदय को समान रूप से स्पर्श करती है।

अकबर ख़ान के लिए यह क्षण गहन संतोष और भावुकता से भरा हुआ था। वे इसे वर्षों की साधना, धैर्य और अटूट विश्वास का प्रतिफल मानते हैं। उनके शब्दों में, यह फ़िल्म उनके लिए केवल एक सिनेमाई परियोजना नहीं रही, बल्कि एक आत्मिक यात्रा रही है ऐसी यात्रा, जिसमें इतिहास, प्रेम और मानवीय संवेदना एक-दूसरे में घुलकर एक नई अनुभूति का सृजन करते हैं। कुआलालंपुर में मिली प्रतिक्रिया ने उनके इस विश्वास को और दृढ़ किया कि सच्चा प्रेम किसी भाषा, सीमा या संस्कृति का मोहताज नहीं होता।
कुआलालंपुर के बाद फ़िल्म की अगली महत्वपूर्ण प्रस्तुति 13 दिसंबर 2025 को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित की गई। यह विशेष स्क्रीनिंग भारत के इंडोनेशिया में राजदूत संदीप चक्रवर्ती के तत्वावधान में सम्पन्न हुई।
इस आयोजन में मंत्रीगण, राजनयिक, सांस्कृतिक हस्तियाँ, कला समीक्षक और प्रभावशाली विचारक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह प्रस्तुति केवल एक फ़िल्म प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्तों का उत्सव बन गई।

अकबर ख़ान इस पहल को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु को और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। उनके अनुसार, ताज महल प्रेम, शांति और सौहार्द का प्रतीक है, और यही मूल्य भारत व इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक आत्मा में भी गहराई से रचे-बसे हैं।
इतिहास साक्षी है कि कला, संस्कृति और अध्यात्म के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद और आदान-प्रदान होता रहा है। यह फ़िल्म उसी ऐतिहासिक साम्य को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करती है।
इन विशेष निजी स्क्रीनिंग्स को अकबर ख़ान अपनी वैश्विक रणनीति का अहम हिस्सा मानते हैं। उनका विश्वास है कि किसी फ़िल्म को सीधे व्यावसायिक प्रदर्शन में उतारने से पहले, उसे सांस्कृतिक और भावनात्मक स्तर पर स्थापित करना अत्यंत आवश्यक होता है। जब किसी कृति को राजनयिकों, सांस्कृतिक नेतृत्व और विचारशील वर्ग का समर्थन मिलता है, तो उसका संदेश कहीं अधिक गहराई, गरिमा और विश्वसनीयता के साथ आम दर्शकों तक पहुँचता है। मलेशिया और इंडोनेशिया में मिली सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने फ़िल्म की अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।

फ़िल्म का औपचारिक वैश्विक शुभारंभ 6 फरवरी 2026 को कुआलालंपुर में होने वाले वर्ल्ड गाला प्रीमियर के साथ होगा। इसके बाद 13 फरवरी 2026 को इंडोनेशिया में इसे भव्य स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज़ किया जाएगा।
वैलेंटाइन वीक के दौरान फ़िल्म की रिलीज़ अपने आप में गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखती है। अकबर ख़ान के अनुसार, चूँकि ताज महल शाश्वत प्रेम का सबसे सशक्त प्रतीक है, इसलिए प्रेम के सप्ताह में इसका प्रदर्शन दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय भावनात्मक अनुभव बन जाएगा।
इंडोनेशिया में फ़िल्म के वितरण की ज़िम्मेदारी पीटी ओमेगा फ़िल्म को सौंपी गई है, जो वहाँ की सबसे प्रतिष्ठित और अनुभवी वितरण कंपनियों में से एक मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सफल फ़िल्मों के वितरण का अनुभव रखने वाली यह कंपनी ‘ताज महल: एन इटरनल लव स्टोरी’ को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
निर्देशक, निर्माता और लेखक, तीनों भूमिकाओं में अकबर ख़ान ने इस फ़िल्म को अपने संपूर्ण सृजनात्मक समर्पण के साथ आकार दिया है। उनके लिए शाहजहाँ और मुमताज़ महल की कथा केवल ऐतिहासिक घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि भावनाओं, त्याग, निष्ठा और अनंत प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति है। उनका उद्देश्य केवल मुगलकालीन वैभव और स्थापत्य की भव्यता दिखाना नहीं था, बल्कि उस मानवीय संवेदना को उजागर करना था, जिसने ताज महल जैसे अद्वितीय स्मारक को जन्म दिया।

अकबर ख़ान चाहते हैं कि दर्शक जब यह फ़िल्म देखें, तो वे केवल एक कहानी देखकर सिनेमाघर से बाहर न निकलें, बल्कि अपने साथ एक गहरी अनुभूति लेकर जाएँ—एक ऐसा एहसास, जो उन्हें प्रेम की गहराई और इतिहास की आत्मा से जोड़ दे। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही होगी कि लोग यह महसूस करें कि ताज महल केवल भारत की धरोहर नहीं, बल्कि पूरी मानवता की साझा विरासत है।
इस प्रकार ‘ताज महल: एन इटरनल लव स्टोरी’ आज केवल एक फ़िल्म नहीं रह गई है, बल्कि प्रेम, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का एक वैश्विक उत्सव बनकर उभर रही है—एक ऐसी सिनेमाई कृति, जो आने वाले समय में दुनिया भर के दर्शकों के दिलों में अपनी स्थायी और अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।