नई दिल्ली
जब रील लाइफ और रियल लाइफ की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं, तो कहानियां इतिहास बन जाती हैं। सरकार में दिखाई गई राजनीतिक कहानी अब थलपति विजय के जीवन में हकीकत बनती नजर आ रही है। जिस किरदार में उन्होंने एक आम नागरिक से जननेता बनने का सफर तय किया था, वही छवि अब असल राजनीति में भी दिख रही है।
2018 में रिलीज़ हुई फिल्म सरकार में विजय ने ‘सुंदरम’ नाम के एक कॉर्पोरेट प्रोफेशनल का रोल निभाया था, जो विदेश से लौटकर वोट डालने जाता है, लेकिन पाता है कि उसका वोट पहले ही कोई और डाल चुका है। यहीं से कहानी मोड़ लेती है। वह इस धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाता है और धीरे-धीरे पूरे सिस्टम की खामियों को चुनौती देता है। फिल्म में वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ता है और भ्रष्ट राजनीति के खिलाफ लड़ाई छेड़ देता है।
इस किरदार की खास बात यह थी कि वह सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए राजनीति में नहीं आता, बल्कि सिस्टम को बदलने के उद्देश्य से आगे बढ़ता है। फिल्म के अंत में उसकी पार्टी जीतती है, लेकिन वह खुद मुख्यमंत्री बनने के बजाय एक ईमानदार अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंप देता है। यह संदेश देता है कि असली नेतृत्व सत्ता से नहीं, बल्कि सोच और नीयत से तय होता है।
अब अगर असल जिंदगी की बात करें, तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। Tamilaga Vettri Kazhagam के जरिए राजनीति में कदम रखने वाले विजय ने अपने पहले ही चुनाव में जबरदस्त सफलता हासिल की है। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में उनकी पार्टी ने 107 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया। यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
विजय की इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। वह लोगों के बीच एक भरोसेमंद चेहरा बन चुके हैं। युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग के बीच उनकी पकड़ मजबूत दिखाई दी है। यही कारण है कि उन्हें अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है।
फिल्म इंडस्ट्री से भी उन्हें भरपूर समर्थन मिला है। रजनीकांत, धनुष, रश्मिका मंदाना और ए. आर. रहमान जैसे बड़े नामों ने उनकी जीत पर खुशी जाहिर की। यह समर्थन सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उनके प्रभाव और स्वीकार्यता का संकेत भी है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां फिल्म सरकार में उनका किरदार सत्ता से दूरी बनाकर सिस्टम को सुधारने की बात करता है, वहीं वास्तविक जीवन में जनता ने उन्हें सीधे सत्ता की जिम्मेदारी सौंपने का संकेत दिया है। पेरम्बूर जैसे क्षेत्र में उनकी बड़ी जीत इस बात का प्रमाण है कि लोग उन्हें सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि नेता के रूप में स्वीकार कर चुके हैं।
तमिलनाडु की राजनीति में पहले भी फिल्मी सितारों का प्रभाव रहा है, लेकिन विजय का सफर थोड़ा अलग नजर आता है। उन्होंने सिर्फ अपनी स्टार इमेज पर भरोसा नहीं किया, बल्कि एक मजबूत संगठन और स्पष्ट राजनीतिक संदेश के साथ आगे बढ़े।
कुल मिलाकर, सरकार की कहानी अब सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है। यह एक ऐसी पटकथा बन गई है, जो असल जिंदगी में लिखी जा रही है—जहां एक अभिनेता जनता का नेता बनकर उभर रहा है और राजनीति की दिशा बदलने की कोशिश कर रहा है।