मुंबई
प्रसिद्ध फिल्मकार Subhash Ghai ने ऑस्कर विजेता संगीतकार A. R. Rahman के हालिया बयान को लेकर उठे ‘सांप्रदायिक’ विवाद पर खुलकर उनका समर्थन किया है। सुभाष घई का कहना है कि रहमान की बातों को गलत संदर्भ में पेश किया गया और इस पूरे मामले को “बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर” दिखाया जा रहा है।
ANI से बातचीत में सुभाष घई ने कहा कि वे 1994 से एआर रहमान को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और दोनों के बीच दशकों पुराना पेशेवर व निजी रिश्ता है। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी रहमान को फिल्म इंडस्ट्री में धार्मिक या सांप्रदायिक भेदभाव की बात करते नहीं सुना।
घई के शब्दों में, “मैं उन्हें वर्षों से जानता हूं। हम आज भी मिलते हैं, स्टूडियो में साथ काम करते हैं। मैंने हमेशा उन्हें आध्यात्मिकता और इंसानियत में विश्वास रखने वाला पाया है, न कि धर्म के आधार पर किसी को बांटने वाला।”
सुभाष घई ने यह भी याद दिलाया कि एआर रहमान ने अपने करियर में भजन, सूफी कलाम और हर तरह के सांस्कृतिक संगीत की रचना की है। उन्होंने कहा कि हिंदी फिल्म उद्योग देश का सबसे धर्मनिरपेक्ष क्षेत्र है, जहां लोग भाईचारे के साथ काम करते हैं। “यह इंडस्ट्री किसी एक सोच से नहीं चलती, बल्कि विविधता और मेल-जोल से आगे बढ़ती है,” घई ने कहा।
गौरतलब है कि एआर रहमान ने हाल ही में BBC Asian Network को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें मिलने वाला काम कम हुआ है। उन्होंने इसे इंडस्ट्री के बदलते माहौल से जोड़ा था। इसी बयान को लेकर सोशल मीडिया और सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
विवाद बढ़ने के बाद एआर रहमान ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संगीत हमेशा से लोगों, परंपराओं और संस्कृतियों को जोड़ने का माध्यम रहा है। “मेरे इरादों को कभी-कभी गलत समझ लिया जाता है, लेकिन मेरा मकसद हमेशा संगीत के ज़रिये सेवा करना रहा है,” रहमान ने कहा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व है, क्योंकि भारत उन्हें अभिव्यक्ति की आज़ादी और बहुसांस्कृतिक आवाज़ों को सम्मान देने का अवसर देता है।
इस पूरे मुद्दे पर फिल्म इंडस्ट्री के कई नामचीन लोग अपनी-अपनी राय रख चुके हैं। पहले ही Kangana Ranaut, Paresh Rawal और Ranvir Shorey भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं।फिलहाल, सुभाष घई का समर्थन एआर रहमान के पक्ष में एक मजबूत आवाज़ के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने इस बहस को संतुलित नजरिये से देखने की अपील की है।