आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार मधुबाला का जन्म 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में हुआ था। उनका असली नाम मुमताज़ जहां बेगम देहलवी था। उन्हें भारतीय सिनेमा की “वीनस” और “सौंदर्य की मूरत” कहा जाता है।
मधुबाला ने बहुत कम उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। बतौर बाल कलाकार उन्होंने फिल्म बसंत (1942) से शुरुआत की। लेकिन उन्हें असली पहचान 1949 की फिल्म महल से मिली, जिसमें उनके अभिनय और खूबसूरती ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उनकी सबसे यादगार फिल्म 1960 में आई मुगल-ए-आज़म मानी जाती है, जिसमें उन्होंने अनारकली का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनकी अदाकारी आज भी मिसाल मानी जाती है। उनकी मुस्कान, मासूमियत और स्क्रीन प्रेज़ेंस ने उन्हें लाखों दिलों की धड़कन बना दिया था।
मधुबाला ने अपने करियर में चलती का नाम गाड़ी, हावड़ा ब्रिज, काला पानी और तराना जैसी कई हिट फिल्में दीं। वे न सिर्फ खूबसूरत थीं, बल्कि एक बेहतरीन अभिनेत्री भी थीं, जो हर किरदार में जान डाल देती थीं।
दुर्भाग्य से उन्हें दिल की गंभीर बीमारी थी। लंबी बीमारी के बाद 23 फरवरी 1969 को सिर्फ 36 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनका जीवन छोटा जरूर था, लेकिन उन्होंने भारतीय सिनेमा पर अमिट छाप छोड़ी।
आज उनके जन्मदिन पर उन्हें याद करना सिर्फ एक अदाकारा को याद करना नहीं, बल्कि उस दौर को सलाम करना है, जब अभिनय और खूबसूरती का संगम मधुबाला के रूप में पर्दे पर चमकता था।