ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान हाल ही में उत्तराखंड के टिहरी जनपद पहुंचीं, जहां उन्होंने पंवाली कांठा बुग्याल की रोमांचक ट्रैकिंग कर प्रकृति और बर्फबारी के बीच खास अनुभव लिया। जानकारी के अनुसार सारा अली खान घुत्तू क्षेत्र के ग्वाणा गांव पहुंचीं, जहां से उन्होंने लगभग 18 किलोमीटर लंबे पैदल ट्रैक की शुरुआत की। यह पूरा ट्रैक घने जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और बेहद खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के बीच से होकर गुजरता है, जो ट्रैकर्स के लिए किसी रोमांच से कम नहीं माना जाता।
ट्रैक के दौरान सारा अली खान ने बीच रास्ते में दोफन नामक स्थान पर रुककर विश्राम किया, जहां किसी भी प्रकार की होटल या रेस्टोरेंट जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने वहां बर्फबारी के बीच टेंट में रुककर असली एडवेंचर का अनुभव लिया और कठिन परिस्थितियों में भी पहाड़ी जीवन की सादगी को महसूस किया। यह पूरा ट्रैक लगभग दो रात और तीन दिन का रहा, जिसमें उन्होंने लगातार पहाड़ी इलाकों में यात्रा की और अलग-अलग पड़ावों पर समय बिताया।
अगले दिन सारा अली खान पंवाली कांठा बुग्याल पहुंचीं, जहां उस समय ताजा बर्फबारी के कारण पूरा क्षेत्र सफेद बर्फ की चादर से ढका हुआ था। यहां उन्होंने बुग्याल की मनमोहक वादियों, बर्फ से ढके पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता का करीब से दीदार किया और लंबे समय तक वहां समय बिताया। बर्फीले और शांत वातावरण ने उनके इस अनुभव को और भी खास बना दिया। बाद में वह दोफन लौट आईं और अगले दिन घुत्तू क्षेत्र के लिए रवाना हो गईं।
इस यात्रा के दौरान सारा अली खान ने स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की और उनके साथ समय बिताया। उन्होंने पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद भी चखा, जिसमें मंडवे की रोटी, स्थानीय दालें और लिंगड़ी की सब्जी शामिल थी। स्थानीय लोगों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह स्थान बेहद खूबसूरत और शांत है और यहां आकर उन्हें गहरा सुकून मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद यादगार रहा और वह भविष्य में दोबारा यहां आना चाहेंगी।
वहीं ट्रैकिंग टीम से जुड़े स्काई हाइक कंपनी के ट्रैकर कुलदीप रावत ने बताया कि सारा अली खान उनके साथ पंवाली कांठा ट्रैक पर आई थीं और उनका पूरा अनुभव काफी शानदार रहा। उन्होंने बताया कि यह ट्रैक कुल दो रात और तीन दिन का था और सारा ने पूरे उत्साह के साथ इसे पूरा किया। ट्रैक के दौरान उन्होंने स्थानीय खान-पान का भी आनंद लिया और पहाड़ी भोजन जैसे मंडवे की रोटी, स्थानीय दालें और लिंगड़ी की सब्जी का स्वाद लिया। कुलदीप रावत के अनुसार सारा का अनुभव बेहद अच्छा रहा और उन्होंने पूरी यात्रा को काफी एंजॉय किया।
इस पूरी यात्रा के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि पंवाली कांठा जैसे सुंदर लेकिन कम चर्चित ट्रैकिंग स्थलों को नई पहचान मिलेगी, जिससे स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र में आने वाले समय में ट्रैकिंग और इको-टूरिज्म गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।