संजय दत्त ने विवादित गाने पर मांगी माफी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 29-04-2026
Sanjay Dutt Apologizes for Controversial Song
Sanjay Dutt Apologizes for Controversial Song

 

नई दिल्ली

बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी कोई फिल्मी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक विवादित गाना है। आगामी फिल्म केडी: द डेविल के हिंदी संस्करण में शामिल एक गाने को लेकर उठे विवाद के बाद संजय दत्त को महिला आयोग के सामने पेश होकर माफी मांगनी पड़ी।

दरअसल, फिल्म के एक गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ पर अश्लील भाषा और आपत्तिजनक दृश्यों के इस्तेमाल का आरोप लगा था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला आयोग ने फिल्म से जुड़े कलाकारों और निर्माताओं को तलब किया। सोमवार (27 अप्रैल) को संजय दत्त आयोग के समक्ष पेश हुए और उन्होंने लिखित रूप में माफीनामा सौंपा।

अपने माफीनामे में संजय दत्त ने साफ तौर पर कहा कि उनका किसी भी वर्ग, विशेष रूप से महिलाओं या बच्चों की भावनाओं को आहत करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर उनके काम से समाज में गलत संदेश गया है तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया। संजय दत्त ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए 50 आदिवासी लड़कियों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। यह कदम महिला सशक्तिकरण और शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। साथ ही उन्होंने भविष्य में अपने किसी भी रचनात्मक कार्य में महिलाओं और बच्चों की गरिमा का विशेष ध्यान रखने का वादा किया।

हालांकि, इस मामले में शामिल अभिनेत्री नोरा फतेही आयोग के सामने पेश नहीं हो सकीं। उन्होंने जानकारी दी कि वह फिलहाल विदेश में हैं और अगली सुनवाई के लिए समय मांगा है। आयोग ने उनके अनुरोध पर विचार करने की बात कही है।

गौरतलब है कि इस मामले की पहली सुनवाई 7 अप्रैल को हुई थी, जिसमें फिल्म के निर्देशक प्रेम, गीतकार रकीब आलम और प्रोडक्शन कंपनी के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। उस समय निर्माताओं ने यह दलील दी थी कि उन्हें गाने के बोलों के नकारात्मक प्रभाव का अंदाजा नहीं था। लेकिन महिला आयोग ने इस तर्क को खारिज कर दिया।

इसके बाद फिल्म निर्माताओं ने लिखित माफी दी और स्वीकार किया कि गाने के कंटेंट से समाज पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता या महिलाओं की गरिमा से समझौता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि फिल्म उद्योग को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ काम करने की जरूरत है। दर्शकों पर फिल्मों का गहरा प्रभाव पड़ता है, ऐसे में कंटेंट की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी हो जाती है।