नई दिल्ली
म्यूजिक की दुनिया में ए.आर. रहमान ने एक और यादगार पल जोड़ दिया है। लंदन के मशहूर रॉयल अल्बर्ट हॉल में उनका तीन दिन का सोल्ड आउट शो हुआ। यह सिर्फ एक कॉन्सर्ट नहीं था। यह भारतीय और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का एक साथ मिलना था।
इस शो को कंपोजर और एसोसिएट आर्टिस्ट ऋषिल रंजन के साथ मिलकर तैयार किया गया था। मंच पर युवा कलाकारों को खास जगह दी गई। यही इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत रही।
शो का नाम रखा गया ‘ए.आर. रहमान एक्स ऋषिल रंजन’। इसमें नई पीढ़ी के संगीतकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मौका दिया गया। रहमान का मकसद साफ था कि नए टैलेंट को दुनिया के सामने लाया जाए।
इस इवेंट का एक खास हिस्सा था नया संगीत ‘रंगरेज़ा’। इसे रहमान और ऋषिल रंजन ने मिलकर तैयार किया। इस रचना में सूफी विचारों की झलक थी। इसमें संस्कृतियों के बीच जुड़ाव और आध्यात्मिकता को संगीत के जरिए दिखाया गया।
इस प्रस्तुति में रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा और लंदन वॉइसेज ने हिस्सा लिया। साथ ही गायिका आबी सम्पा और कंडक्टर मेल्विन टे ने इसे और खास बनाया।
शो का सबसे भावुक पल तब आया जब रहमान के केएम म्यूजिक कंजरवेटरी और सनशाइन ऑर्केस्ट्रा के युवा कलाकारों ने मंच संभाला। ये वे बच्चे हैं जो कम संसाधनों से आते हैं लेकिन संगीत के लिए बड़ा सपना रखते हैं।
इन युवा कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय ऑर्केस्ट्रा के साथ मिलकर प्रदर्शन किया। यह एक ऐसा दृश्य था जो बहुत कम देखने को मिलता है। एक ही मंच पर अलग दुनिया के संगीतकार साथ थे।
रहमान ने इस मौके पर कहा कि जब वे इन बच्चों को रॉयल फिलहारमोनिक ऑर्केस्ट्रा के साथ देखते हैं तो यह उनके लिए बेहद खास पल होता है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के रूप में ऐसे पल उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जब आप बिना उम्मीद के किसी बीज को बोते हैं तो समय आपको उससे भी बड़ा फल देता है। उन्होंने युवा संगीतकारों पर गर्व जताया।
इस शो में गायक सर्थक कल्याणी और परकशनिस्ट जनन सथिएन्द्रन ने भी प्रस्तुति दी। वहीं कोरियोग्राफी की जिम्मेदारी प्रसिद्ध डांसर आकाश ओडेड़ा ने संभाली। इससे पूरे शो में संगीत के साथ दृश्य कला का भी मेल दिखाई दिया।
कॉन्सर्ट में रहमान की फिल्मों के मशहूर गानों को भी नए ऑर्केस्ट्रा अंदाज में पेश किया गया। ‘जोधा अकबर’, ‘गुरु’, ‘127 आवर्स’ और ‘रॉकस्टार’ जैसे संगीत को नए रूप में सुनकर दर्शक भावुक हो गए।
यह शो सिर्फ संगीत का कार्यक्रम नहीं था। यह एक सांस्कृतिक मिलन था। जहां भारतीय फिल्म संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। सबसे बड़ी बात यह रही कि युवा कलाकारों को पहली बार इतना बड़ा मंच मिला और उन्होंने दुनिया को दिखा दिया कि भारत का भविष्य संगीत में कितना मजबूत है।