आमिर इकबाल
हॉलीवुड की सुपरस्टार मार्गोट रॉबी ने अपनी नई फिल्म ‘वुदरिंग हाइट्स’ के लॉस एंजेलेस प्रीमियर में सिर्फ अपने अभिनय या फैशन से ही लोगों का ध्यान नहीं खींचा, बल्कि उनके गले में पहना गया नेकलेस इतिहास और विरासत की बहस का केंद्र बन गया। यह नेकलेस कोई साधारण गहना नहीं था, बल्कि मुगल कालीन भारत से जुड़ी एक अमूल्य विरासत का प्रतीक था।
फैशन मैगज़ीन वोग की रिपोर्ट के अनुसार, यह हार मुगल रानी नूरजहां से संबंधित है और इसे ‘ताजमहल डायमंड नेकलेस’ के नाम से जाना जाता है। यह वही ऐतिहासिक गहना है, जो कभी हॉलीवुड की लेजेंडरी एक्ट्रेस एलिज़ाबेथ टेलर के पास भी रहा। मार्गोट रॉबी ने प्रीमियर पर डिज़ाइनर शियापरेली की खास ड्रेस पहनी थी, लेकिन असली चर्चा उनके गले में चमक रहे इस अनमोल हार की रही।
यह हार दिल के आकार के हीरे से बना है, जिसे जेड में जड़ा गया है और सोने, रूबी और हीरों की चेन से सजा हुआ है। हार पर फ़ारसी में भी कुछ लिखा गया है , “प्यार हमेशा रहता है” और इसमें रानी नूरजहां का नाम भी अंकित है। इतिहासकारों के अनुसार, यह गहना मुगल बादशाह जहांगीर ने अपनी पत्नी नूरजहां को प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानकर दिया था। बाद में यह हार मुमताज़ महल तक पहुँचा, यही कारण है कि इसे ताजमहल से जोड़कर देखा जाने लगा।
इतिहास ने इस हार को भारत से बाहर ले जाने का भी मार्ग प्रशस्त किया। कई सालों तक यह गहना यूरोप में रहा और बाद में प्रसिद्ध ज्वेलरी ब्रांड कार्टियर के पास चला गया। कार्टियर ने इसे नए डिज़ाइन में तैयार किया और 1972में इसके प्रेसिडेंट ने यह हार एलिज़ाबेथ टेलर को उनके पति रिचर्ड बर्टन की ओर से तोहफ़े में दिया। एलिज़ाबेथ टेलर की मौत के बाद, 2011में इसे नीलामी में करीब 8.8मिलियन डॉलर में बेचा गया, जो उस समय किसी भारतीय ज्वेलरी के लिए रिकॉर्ड राशि थी।
मार्गोट रॉबी द्वारा इस हार को पहनने के बाद अब नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया और इतिहास प्रेमियों में चर्चा है कि भारत से जुड़े ऐसे कीमती और ऐतिहासिक गहने कॉलोनियल दौर में कैसे बाहर चले गए। भारत आज भी अपने कई अमूल्य खज़ानों को वापस लाने के प्रयास में है,जिसमें विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी शामिल है। इस नेकलेस ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर कितनी सुरक्षित रही और अब इसे कैसे संरक्षित किया जा सकता है।
फैशन और इतिहास का यह संगम सिर्फ बाहरी चमक तक सीमित नहीं रहा। यह गहना भारतीय कला, मुगल कालीन ज्वेलरी डिज़ाइन और वैश्विक हस्तियों के बीच भारत की सांस्कृतिक धरोहर की यात्रा को उजागर करता है। यह हार न केवल नूरजहां और मुमताज़ महल की याद दिलाता है, बल्कि भारत से यूरोप तक इसके सफर की कहानी भी बताता है।
मार्गोट रॉबी की फिल्म ‘वुदरिंग हाइट्स’ 13फरवरी को रिलीज़ होने वाली है। फिल्म प्रसिद्ध लेखिका एमिली ब्रोंटे के गॉथिक नॉवेल पर आधारित है। फिल्म में मार्गोट रॉबी लीड रोल में अभिनेता जैकब एलोर्डी के साथ दिखाई देंगी। प्रीमियर के दौरान उनकी यह उपस्थिति, डिज़ाइनर ड्रेस और ऐतिहासिक हार ने न केवल फैशन प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई।
इतिहासकारों और ज्वेलरी विशेषज्ञों के अनुसार, यह हार भारतीय कला का एक अनमोल नमूना है। यह दिखाता है कि कैसे मुगल कालीन गहने सिर्फ आभूषण नहीं थे, बल्कि प्रेम, शक्ति और साम्राज्य की पहचान का प्रतीक भी थे। आज, यह हार न केवल हॉलीवुड की चमक-धमक में दिखाई दे रहा है, बल्कि यह भारत की खोई हुई सांस्कृतिक धरोहर की याद भी दिलाता है।
मार्गोट रॉबी का यह कदम एक तरह से इतिहास और फैशन के संगम को दर्शाता है। इसके माध्यम से यह सवाल उठता है कि भारत की अमूल्य धरोहर को कैसे संरक्षित किया जाए और उसे वापस लाने के प्रयास में किस प्रकार की वैश्विक जागरूकता जरूरी है। इस हार ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि कभी-कभी फैशन सिर्फ दिखावे का नहीं, बल्कि इतिहास और विरासत के संवाद का माध्यम भी बन सकता है।
इस प्रकार, मार्गोट रॉबी का ताजमहल डायमंड नेकलेस पहनना सिर्फ एक स्टाइल स्टेटमेंट नहीं, बल्कि इतिहास, प्रेम, शक्ति और भारत की सांस्कृतिक धरोहर की बहस को फिर से जीवंत करने वाला एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।