फिल्म सर्टिफिकेशन पर कमल हासन की चिंता, बोले पारदर्शिता की कमी से जनविश्वास कमजोर होता है

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 10-01-2026
Kamal Haasan expresses concern over film certification, saying lack of transparency undermines public trust
Kamal Haasan expresses concern over film certification, saying lack of transparency undermines public trust

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
चेन्नई, 10 जनवरी। वरिष्ठ अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। ‘जन नायकन’ फिल्म से जुड़े कानूनी विवाद के बीच उन्होंने बिना किसी संस्था या फिल्म का नाम लिए सेंसरशिप व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पारदर्शिता के अभाव में न सिर्फ रचनात्मकता प्रभावित होती है, बल्कि सार्वजनिक विश्वास भी कमजोर होता है।

कमल हासन ने अपने बयान में कहा कि भारत का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है, जिसे किसी भी तरह की अस्पष्ट और अपारदर्शी प्रक्रिया से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात को दर्शाता है कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में कला और कलाकारों को कितना स्पेस दिया जाता है। उनके अनुसार, सिनेमा केवल एक व्यक्ति की मेहनत नहीं, बल्कि लेखकों, तकनीशियनों, कलाकारों, प्रदर्शकों और इससे जुड़े छोटे व्यवसायों की सामूहिक आजीविका है, जो एक निष्पक्ष और समयबद्ध सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर निर्भर करती है।
 
हासन ने साफ कहा कि जब सर्टिफिकेशन में स्पष्टता नहीं होती, तो रचनात्मकता बाधित होती है और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तमिलनाडु और देश के दर्शक समझदार और परिपक्व हैं, इसलिए वे खुलेपन और सम्मान के हकदार हैं। उनके अनुसार, अब जरूरत है कि फिल्म सर्टिफिकेशन प्रक्रिया की सैद्धांतिक समीक्षा की जाए, जिसमें तय समय-सीमा, पारदर्शी मूल्यांकन और हर कट या बदलाव के लिए लिखित व तर्कसंगत कारण दिए जाएं।
 
कमल हासन की यह प्रतिक्रिया अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ से जुड़े विवाद के बाद सामने आई है। मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में फिल्म को U/A 16+ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था, हालांकि बाद में इस पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी। हासन ने फिल्म इंडस्ट्री से एकजुट होकर सार्थक संवाद करने की अपील की और कहा कि ऐसे सुधार न सिर्फ रचनात्मक स्वतंत्रता की रक्षा करेंगे, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसे को भी मजबूत करेंगे।