लॉस एंजिल्स [US]
ईरान की एक अदालत ने ईरानी फिल्ममेकर जाफर पनाही की एक साल की जेल की सज़ा को बरकरार रखा है। यह फ़ैसला "सरकार के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा गतिविधि" के आरोपों से जुड़े एक नए ट्रायल के बाद आया है। 'डेडलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान रिवोल्यूशनरी कोर्ट के जज ईमान अफशरी ने पनाही की कानूनी टीम की आपत्तियों को खारिज कर दिया और उस पुराने फ़ैसले को बरकरार रखा जो उनकी गैर-मौजूदगी में सुनाया गया था। पनाही के वकील, मुस्तफा नीली ने फ़ैसले की जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने "सरकार के ख़िलाफ़ एक अंडरग्राउंड और विवादित फिल्म" बनाने के आरोपों पर सज़ा को बरकरार रखा है।
'डेडलाइन' के अनुसार, ईरान के 'एमतेदाद' को दिए एक इंटरव्यू में नीली ने कहा, "शुरुआती फ़ैसले के तहत, पनाही को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के ख़िलाफ़ प्रोपेगैंडा में शामिल होने के आरोप में एक साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी।" यह फ़ैसला तब आया जब पनाही ईरान से बाहर अपनी कान (Cannes) पाल्मे डी'ओर जीतने वाली फिल्म 'इट वॉज़ जस्ट एन एक्सीडेंट' का प्रमोशन कर रहे थे। एक साल की जेल की सज़ा के अलावा, फिल्ममेकर पर दो साल का ट्रैवल बैन भी लगाया गया है। साथ ही, उन्हें राजनीतिक और सामाजिक समूहों की सदस्यता लेने से भी रोक दिया गया है। नीली ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए इस फ़ैसले को अभी भी चुनौती दी जा सकती है और बताया कि 20 दिनों के भीतर अपील दायर की जा सकती है।
'डेडलाइन' के मुताबिक, पनाही को कई सालों से ईरान में कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जुलाई 2022 में, उन्हें तेहरान की एविन जेल में साथी फिल्ममेकर्स मोहम्मद रसूलौफ़ और मुस्तफा अल-अहमद के बारे में जानकारी लेने जाने के बाद गिरफ़्तार कर लिया गया था, जिन्हें कुछ दिन पहले ही हिरासत में लिया गया था। गिरफ़्तारी के तुरंत बाद, ईरानी अधिकारियों ने 2010 में उनके ख़िलाफ़ सुनाई गई छह साल की जेल की सज़ा को फिर से लागू कर दिया, साथ ही फिल्म बनाने और विदेश यात्रा करने पर 20 साल का प्रतिबंध भी लगा दिया।
पुराना मामला 2009 के 'ग्रीन मूवमेंट' विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए एक छात्र के अंतिम संस्कार में पनाही के शामिल होने और विद्रोह से जुड़ी घटनाओं से प्रेरित फिल्म बनाने की उनकी कथित कोशिश से जुड़ा था। भूख हड़ताल करने के बाद फरवरी 2023 में पनाही को जेल से रिहा कर दिया गया था।
इस फिल्ममेकर को ईरान के सबसे प्रशंसित निर्देशकों में से एक माना जाता है और उन्होंने अपने करियर में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। उनकी फ़िल्मों को दुनिया भर के प्रमुख फ़िल्म फ़स्टिवलों में काफ़ी पहचान मिली है।