नई दिल्ली।
अभिनेता इमरान खान को भारत में रहने की अनुमति से जुड़े मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। देश छोड़ने के आदेश को चुनौती देने वाले अभिनेता की भूमिका पर अदालत ने असंतोष जताया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल हलफनामा दाखिल कर देने से मामला सुलझने वाला नहीं है। पीठ ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इमरान खान से बिना शर्त माफी की अपेक्षा है।
भारत में निवास के अधिकार को लेकर कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहे इमरान खान ने देश छोड़ने के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सुनवाई के दौरान अभिनेता ने दलील दी कि विवादित विरोध कार्यक्रम के आयोजकों से उनका कोई संबंध नहीं था।
इमरान खान ने अपने पक्ष में हलफनामा दाखिल करने पर सहमति जताई। साथ ही उन्होंने अदालत से भारत में रहने की अनुमति देने की गुहार भी लगाई। हालांकि, पीठ उनके इस रुख से संतुष्ट नहीं हुई।
अदालत ने संकेत दिया कि केवल अपना पक्ष रखने या हलफनामा देने से उनकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। पीठ ने बिना शर्त माफी की जरूरत पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश जाकर इसी तरह की गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसे अगली ही उड़ान से भारत वापस भेज दिया जाएगा।
अदालत ने इमरान खान के भारत में लंबे समय से रहने का जिक्र करते हुए यह सवाल भी उठाया कि इतने वर्षों बाद उन्होंने अचानक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने का फैसला क्यों किया।
फिलहाल, मामले में अभिनेता को भारत में रहने की अनुमति मिलेगी या नहीं, यह अदालत के आगे के रुख और मामले की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।