विरोध प्रदर्शन पर हेमा मालिनी का सवाल, छिड़ी बहस

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 21-07-2026
Hema Malini questions the protests; debate ensues.
Hema Malini questions the protests; debate ensues.

 

नई दिल्ली:

राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अभिनेत्री और भाजपा सांसद हेमा मालिनी का बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने संसद के बाहर हो रहे प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल विरोध प्रदर्शन से समाधान नहीं निकलेगा और इस तरह के आंदोलनों से आखिर क्या हासिल होगा।

सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता संसद की ओर मार्च करने के लिए जुटे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। इस प्रदर्शन का आह्वान सोशल मीडिया आधारित संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने किया था, जो पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर धरना दे रहा है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र संसद तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते थे।

इस आंदोलन को पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक का भी समर्थन मिला है। बताया गया कि वे छात्रों की मांगों के समर्थन में पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर पुलिस और प्रशासन ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। इस घटनाक्रम के बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस और तेज हो गई।

सोमवार सुबह जैसे ही प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, दिल्ली पुलिस ने श्रमशक्ति भवन के पास उन्हें रोक दिया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के कदम उठाए, जिसके बाद इलाके में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद कंगना रनौत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि संसद में जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और ऐसे प्रदर्शनों से कामकाज प्रभावित नहीं होना चाहिए।

इसी क्रम में भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने भी विरोध प्रदर्शन के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद के कामकाज में व्यवधान डालने से किसी समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। उनके अनुसार यदि किसी मुद्दे पर असहमति है तो उसके लिए संवाद और चर्चा का रास्ता अपनाना अधिक प्रभावी होगा। उन्होंने कहा, "विरोध करने से आखिर क्या हासिल होगा? बेहतर होगा कि संबंधित विषय पर उचित चर्चा की जाए और समाधान खोजा जाए।"

हेमा मालिनी ने केंद्र सरकार की शिक्षा संबंधी नीतियों का भी समर्थन किया। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए अनेक पहल की गई हैं।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कहीं कुछ लोग छात्रों की भावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश तो नहीं कर रहे। उनके अनुसार यह आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, लेकिन साथ ही छात्रों के हितों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए।

उधर, विपक्षी दल लगातार सरकार पर परीक्षा प्रणाली में कथित विफलता का आरोप लगा रहे हैं और मामले की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत हैं।