कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और उनकी पत्नी प्रीति अडानी ने गुरुवार को कोलकाता दौरे के दौरान शहर के कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की। गौतम अडानी सफेद कुर्ते-पजामे में थे, जबकि प्रीति अडानी ने बेज रंग का सूट और लाल दुपट्टा पहना था। पूजा करने के बाद प्रीति अडानी ने कहा, "जय काली मां।" अडानी का मंदिर दौरा उनके कोलकाता दौरे का हिस्सा है, जिसमें राज्य के अधिकारियों और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठकें शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये बैठकें बंगाल में निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं पर केंद्रित हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने भी 11 सितंबर को कौशिकी अमावस्या के मौके पर कालीघाट मंदिर का दौरा किया था और मां काली की पूजा की थी। उन्होंने मंदिर की परंपराओं के अनुसार पुलाव और मछली का पारंपरिक भोग भी ग्रहण किया था। पूजा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने कौशिकी अमावस्या को सनातन संस्कृति में एक महत्वपूर्ण अवसर बताया और कहा कि यह त्योहार राज्य भर के प्रमुख मंदिरों, जिनमें कालीघाट और तारापीठ शामिल हैं, में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "आज कौशिकी अमावस्या है। आज हमारी सनातन संस्कृति में बहुत बड़ा दिन है, एक महापूजा है। चाहे यहां कालीघाट हो या वहां तारापीठ, यह सब एक साथ हो रहा है। तारापीठ में राज्य-स्तरीय पूजा हो रही है। यहां कालीघाट में सारी लाइटिंग की व्यवस्था की गई है; चारों ओर उत्सव का माहौल है।" अधिकारी ने कोलकाता के आध्यात्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला और मां काली, मां दुर्गा, रामकृष्ण परमहंस, मां सारदा देवी, स्वामी विवेकानंद और भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के साथ इसके जुड़ाव का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, "यह एक आध्यात्मिक भूमि है। यह मां काली की भूमि है, मां दुर्गा की भूमि है, ठाकुर रामकृष्ण देव की भूमि है, मां सारदा देवी की भूमि है, स्वामी विवेकानंद की भूमि है और भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु की भूमि है।" कालीघाट मंदिर कोलकाता के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और बंगाल की धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं में इसका अहम स्थान है। भोग मंदिर की रीतियों का एक अहम हिस्सा है, जिसमें स्थानीय रीति-रिवाजों और मौकों के अनुसार अलग-अलग तरह के चढ़ावे चढ़ाए जाते हैं।