"For the love of cinema": Journey of Indian indie filmmakers heading to Platform Busan 2026
नई दिल्ली
भारतीय स्वतंत्र सिनेमा के पांच उभरते फिल्मकार इस साल दक्षिण कोरिया के प्रतिष्ठित Busan International Film Festival (BIFF) के तहत आयोजित Platform Busan 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह कार्यक्रम 10 से 13 अक्टूबर तक बुसान में आयोजित होगा।
भारतीय दल में गरिमा पुरा, मेघा कृष्णात्रे, उत्कर्ष चतुर्वेदी, कौस्तुभ मुखर्जी और सौरव यादव शामिल हैं। ये फिल्मकार क्षेत्रीय और हाइपरलोकल कहानियों को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों, निर्माताओं और फाइनेंसरों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।
Platform Busan एशिया के उभरते स्वतंत्र फिल्मकारों के लिए नेटवर्किंग और प्रोफेशनल डेवलपमेंट का मंच है, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण और वित्तीय सहयोग के अवसर मिलते हैं। फिल्मकारों का कहना है कि कई स्थानीय और गैर-पारंपरिक कहानियों को भारत के मुख्यधारा के फिल्म उद्योग में पर्याप्त फंडिंग नहीं मिलती, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंच उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
गरिमा पुरा, जो ऑस्कर विजेता ‘The Elephant Whisperers’ की सह-लेखिका रही हैं, अपनी डार्क कॉमेडी फीचर ‘Pitching Nose Bone’ पेश करेंगी। वहीं उत्कर्ष चतुर्वेदी अपनी कमिंग-ऑफ-एज फिल्म ‘Ready 1...2...’ के लिए सह-निर्माताओं की तलाश करेंगे।
कौस्तुभ मुखर्जी ‘BulBul’ और ‘The Woman With Two Names’ जैसे प्रोजेक्ट लेकर पहुंचेंगे। सौरव यादव अपनी पहली फीचर फिल्म ‘Soma Helang (A Song of Flowers)’ के लिए फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण साझेदार तलाशेंगे। मेघा कृष्णात्रे शॉर्ट फिल्म ‘FlowerMan’ समेत कई प्रोजेक्ट पेश करेंगी।
इन फिल्मकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मंच केवल फिल्मों के प्रदर्शन का अवसर नहीं, बल्कि ऐसे नेटवर्क से जुड़ने का माध्यम भी हैं जो स्थानीय कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचा सकते हैं। उन्होंने भारत में स्वतंत्र सिनेमा के लिए स्थानीय फंडिंग, कम फीस वाले फिल्म फेस्टिवल, क्षेत्रीय फिल्मों के लिए बेहतर स्क्रीनिंग अवसर और फिल्म स्कूलों में फिल्म वित्त एवं सह-निर्माण की शिक्षा की जरूरत पर भी जोर दिया।
Platform Busan 2026 में इन पांच फिल्मकारों की भागीदारी भारतीय स्वतंत्र सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है, जहां स्थानीय कहानियां वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगी।