नई दिल्ली/मुंबई
व्यस्त महानगरों,विशेषकर मुंबई जैसे शहर में, जहाँ एक आम व्यक्ति के लिए रहने की जगह पाना भी एक बड़ा सपना माना जाता है—वहीं प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने जीवन को लेकर एक अलग और सरल दृष्टिकोण अपनाया है। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने जीवन के बदलावों और सोच पर खुलकर बात की।
अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने अपनी सभी आलीशान संपत्तियाँ बेच दी हैं और वर्तमान में किराए के मकान में रह रहे हैं। यह निर्णय किसी आर्थिक संकट का परिणाम नहीं, बल्कि मानसिक शांति और सादगी भरे जीवन की चाह का हिस्सा है। उनके अनुसार, जीवन को अनावश्यक बोझ और तनाव से मुक्त करने के लिए यह एक सोच-समझकर लिया गया कदम है।
‘ज़िंदगी विद ऋचा’ शो में बातचीत के दौरान उन्होंने साझा किया कि वे और उनकी पत्नी किरण खेर लंबे समय से अपने लिए एक स्थायी घर की तलाश में थे। लेकिन सही घर खोजने में लगभग चार वर्ष का समय लग गया। इसी बीच किरण खेर राजनीति में सक्रिय हुईं और सांसद चुने जाने के बाद चंडीगढ़ में रहने लगीं। इस दौरान अनुपम खेर ने महसूस किया कि लगातार संपत्ति और स्थायित्व की तलाश में जीवन की शांति कहीं खो रही है।
उन्होंने बताया कि एक समय पर उन्हें यह एहसास हुआ कि इस भागदौड़ का वास्तविक अर्थ समझना जरूरी है। इसी सोच ने उन्हें किराए के मकान में रहने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार, किराए पर रहना कई तरह की जिम्मेदारियों और मानसिक दबाव को भी कम करता है, जबकि घर खरीदने की प्रक्रिया अक्सर अतिरिक्त तनाव लेकर आती है।
अनुपम खेर ने समाज में बढ़ती भौतिक इच्छाओं पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आज का व्यक्ति अक्सर एक लक्ष्य हासिल करने के बाद उससे बड़ा लक्ष्य तय कर लेता है। यदि किसी के पास 10 करोड़ रुपये हैं, तो वह 20 करोड़ और फिर 25 करोड़ की ओर बढ़ने की इच्छा रखने लगता है। यह लालसा कभी समाप्त नहीं होती और व्यक्ति जीवन के वास्तविक आनंद से दूर होता जाता है। उनके अनुसार, “लोग अब सही तरीके से जीना भूल गए हैं।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि असफलता जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। असफलताएँ हमें नई चीजें सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर देती हैं। कभी-कभी निराशा के क्षण भी आते हैं, लेकिन जीवन का आनंद उन्हें फिर से आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
हालांकि मुंबई में उनका अपना स्थायी घर नहीं है, लेकिन अनुपम खेर ने अपनी मां के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी मां शिमला में एक बड़े घर का सपना देखती थीं, जिसे पूरा करने के लिए उन्होंने वहां एक भव्य बंगला बनवाया।
उनकी यह जीवन-दृष्टि इस बात को दर्शाती है कि सफलता और सुख केवल संपत्ति में नहीं, बल्कि सरलता, संतोष और मानसिक शांति में भी पाया जा सकता है।