नई दिल्ली:
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों की भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी है। आंदोलन कर रहे छात्रों का दावा है कि वे पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रों की मांगें मान लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
भूख हड़ताल पर बैठे एक छात्र ने बताया कि आंदोलन के 14वें दिन उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है और कमजोरी बढ़ती जा रही है। छात्र के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हुआ है।
छात्र ने आरोप लगाया कि सोमवार तड़के करीब दो बजे से विश्वविद्यालय परिसर में गतिविधियां बंद कर दी गईं। उनके अनुसार, पुस्तकालय बंद कर दिए गए, कक्षाएं स्थगित कर दी गईं और पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराई जाने लगी। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे परिसर को बंद कर दिया गया है।
26 अक्टूबर की देर रात सामने आई जानकारी के मुताबिक, जामिया विश्वविद्यालय की असिस्टेंट रजिस्ट्रार और डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (डीएसडब्ल्यू) नीलोफर आंदोलनकारी छात्रों के साथ छात्र संघ की बहाली की मांग पर बातचीत कर रही थीं।
इस बीच, ऐसी खबरें सामने आई हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर सहमत हो गया है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
यदि छात्रों की मांगें स्वीकार किए जाने की खबरों की पुष्टि होती है, तो इसे लंबे आंदोलन के बाद छात्रों की बड़ी कामयाबी माना जाएगा। प्रदर्शनकारी छात्रों की एकजुटता और लगातार विरोध के बीच इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
छात्र संगठनों और आंदोलनकारियों के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव 2006 से बंद हैं। ऐसे में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति और प्रतिनिधित्व के सवाल को फिर से केंद्र में ले आया है।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की दिल्ली इकाई ने भी सोशल मीडिया पर आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया दी। संगठन ने कहा कि जब पूरा देश सो रहा है, तब जामिया जाग रहा है। संगठन ने छात्र संघ चुनाव घोषित करने की मांग को लेकर प्रशासन पर बढ़ते दबाव का उल्लेख किया।
फिलहाल छात्रों की सेहत, विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों की स्थिति और प्रशासन की ओर से मांगों पर औपचारिक निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। भूख हड़ताल के 14वें दिन छात्रों की बिगड़ती सेहत के दावों के बीच मामले ने गंभीरता हासिल कर ली है।