नई दिल्ली,
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को दिया गया अनुमति पत्र वापस कर दिया है। यह कदम कॉलेज द्वारा न्यूनतम शैक्षणिक और अधिष्ठान मानकों का पालन न करने के चलते उठाया गया। एनएमसी के चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड (MARB) ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।
आदेश के अनुसार, शिक्षण वर्ष 2025-26 में इस कॉलेज के माध्यम से प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों के अधिकार सुरक्षित रखे गए हैं। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सक्षम प्राधिकरण द्वारा इन छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों (सुपरन्यूमरेरी) के तौर पर समायोजित किया जाएगा। इसका मतलब है कि किसी भी छात्र को एमबीबीएस सीट खोने का डर नहीं रहेगा। छात्रों को उनके नियमित स्वीकृत प्रवेश के अलावा अतिरिक्त सुविधा प्रदान की जाएगी ताकि उनका करियर प्रभावित न हो।
एनएमसी ने बताया कि इस निर्णय के पीछे एक औचक निरीक्षण का निष्कर्ष था, जिसमें कॉलेज द्वारा निर्धारित मानकों का पालन न करना पाया गया। निरीक्षण में पाया गया कि शिक्षण सुविधाओं, प्रयोगशाला उपकरणों और शैक्षणिक स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं थीं, जो न्यूनतम मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय तुरंत प्रभावी हो गया है और कॉलेज को अपने संचालन में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया गया कि उनके शैक्षणिक अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कड़े कदम यह सुनिश्चित करते हैं कि मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता और मानक बनाए जाएं। एनएमसी ने भविष्य में अन्य संस्थानों के लिए भी नियमित निरीक्षण और मूल्यांकन जारी रखने का संकेत दिया है।
इस निर्णय से छात्रों और अभिभावकों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं, लेकिन प्रशासन और आयोग की ओर से दिए गए सुपरन्यूमरेरी सीट समायोजन के प्रावधान से अधिकांश छात्रों को राहत मिली है।