NEET-UG पेपर लीक मामला: मनीषा संजय हवालदार की हिरासत बढ़ी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 30-05-2026
NEET-UG Paper Leak Case: Manisha Sanjay Hawaldar's CBI Custody Extended by Two Days
NEET-UG Paper Leak Case: Manisha Sanjay Hawaldar's CBI Custody Extended by Two Days

 

नई दिल्ली।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक और अहम सफलता मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को इस मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीषा संजय हवालदार की सीबीआई हिरासत दो दिनों के लिए और बढ़ा दी है। वहीं, सह-आरोपी मनीषा मंधारे को 14 दिनों की सीबीआई हिरासत पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

विशेष सीबीआई न्यायाधीश अजय गुप्ता ने मनीषा संजय हवालदार को सोमवार तक सीबीआई की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी अनुमति दी कि मनीषा मंधारे अपने साथ दो जोड़ी चश्मे रख सकती हैं।

सीबीआई ने मनीषा संजय हवालदार को छह दिनों की हिरासत पूरी होने के बाद अदालत में पेश किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के पुणे से गिरफ्तार की गई हवालदार एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) से जुड़ी हुई थीं और वह भौतिकी विषय की विशेषज्ञ तथा अनुवादक के रूप में कार्य कर चुकी हैं।

सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक वी.के. पाठक ने अदालत को बताया कि मामले की गहराई से जांच के लिए आरोपी से और पूछताछ आवश्यक है। एजेंसी का कहना है कि हवालदार का सामना इस मामले के अन्य आरोपियों से कराया जाना है। इसके अलावा, उन छात्रों से भी आमना-सामना कराया जाएगा, जिनके नाम जांच के दौरान सामने आए हैं।

सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच में यह आरोप सामने आया है कि मनीषा संजय हवालदार ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची और परीक्षा का प्रश्नपत्र अपने पास सुरक्षित रखा। बाद में इसे कथित रूप से आर्थिक लाभ के लिए कुछ लोगों तक पहुंचाया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना अभी बाकी है और इसके लिए आरोपी से विस्तृत पूछताछ जरूरी है। सीबीआई का मानना है कि इस मामले की जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं और इससे जुड़े कई अहम तथ्य अभी सामने आने बाकी हैं।

गौरतलब है कि 25 मई को जब सीबीआई ने मनीषा संजय हवालदार की रिमांड मांगी थी, तब एजेंसी ने अदालत को बताया था कि वह एनटीए द्वारा नियुक्त भौतिकी विषय की अनुवादक थीं। जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि उन्होंने कथित तौर पर प्रश्नपत्र को अवैध रूप से अपने पास रखा और उसे धन के बदले साझा किया।

हालांकि, आरोपी पक्ष ने सीबीआई की मांग का विरोध किया था। मनीषा की ओर से पेश अधिवक्ता अखिलेश रेक्सवाल ने अदालत में कहा था कि उनकी मुवक्किल को 22 मई को गिरफ्तार किया गया था और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। बचाव पक्ष का तर्क था कि पुलिस हिरासत देने का कोई ठोस आधार नहीं है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाना चाहिए।

इसके बावजूद अदालत ने जांच की आवश्यकता को देखते हुए सीबीआई की दलीलों को स्वीकार किया और हिरासत बढ़ाने का फैसला सुनाया।

देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG पेपर लीक मामले में सीबीआई लगातार जांच को आगे बढ़ा रही है। एजेंसी का दावा है कि वह पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने और परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले सभी लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई और नए खुलासों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।