हैदराबाद
मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU) का 29वां स्थापना दिवस आज गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की कार्यकारी परिषद के अध्यक्ष तथा पूर्व एआईसीटीई अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने की।
अपने संबोधन में प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा कि MANUU उन युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ रहा है जो अपने परिवार में पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं। यह एक क्रांतिकारी कार्य है जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन MANUU में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। विश्वविद्यालय में विधि, पैरा-मेडिकल, विज्ञान, वाणिज्य, पॉलिटेक्निक और कौशल विकास जैसे विविध पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देता है तो भी उसे पूर्ण किए गए पाठ्यक्रम के अनुसार प्रमाणपत्र मिलेगा और बाद में वह अपनी शिक्षा पुनः सहजता से जारी रख सकता है। खेल और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए भी अकादमिक क्रेडिट की सुविधा है।
MANUU की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कक्षा 1 से लेकर शोध स्तर तक मातृभाषा उर्दू में शिक्षा प्रदान करने वाला यह देश का एकमात्र विश्वविद्यालय है। उन्होंने शिक्षकों और छात्रों को आजीवन शिक्षार्थी बनने की सलाह दी।
कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि MANUU ने अल्प समय में उल्लेखनीय प्रगति की है और यह एक राष्ट्रीय चरित्र वाला अनूठा विश्वविद्यालय है, जो समाज के अत्यंत वंचित वर्गों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में छात्राओं का नामांकन 5 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों, सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एम.ए. सामी सिद्दीकी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन डे समिति के अध्यक्ष प्रो. सिद्दीकी मोहम्मद महमूद ने प्रस्तुत किया।






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