जेईई परीक्षा 2025 विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एनटीए के खिलाफ याचिका खारिज करने का फैसला बरकरार रखा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 04-01-2026
JEE Exam 2025 Controversy: Delhi High Court division bench upholds decision to dismiss petition against NTA.
JEE Exam 2025 Controversy: Delhi High Court division bench upholds decision to dismiss petition against NTA.

 

नई दिल्ली
 

दिल्ली उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) 2025 को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने संबंधी एकल पीठ के आदेश को सही ठहराया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप प्रमाणित नहीं हो सके।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ दो जेईई अभ्यर्थियों द्वारा दायर अपील की सुनवाई कर रही थी। इन अभ्यर्थियों ने एकल न्यायाधीश के 22 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी रिट याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि उनके द्वारा प्रस्तुत उत्तर पत्र वास्तविक नहीं पाए गए।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि जेईई 2025 की प्रवेश परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, एकल पीठ ने राष्ट्रीय साइबर फोरेंसिक प्रयोगशाला (एनएफसीएल) की रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए इन आरोपों को निराधार माना था और दोनों अभ्यर्थियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

खंडपीठ ने अपने 22 दिसंबर को पारित आदेश में एकल पीठ के निष्कर्षों से सहमति जताई, लेकिन जुर्माने के प्रावधान में आंशिक संशोधन किया। अदालत ने आर्थिक दंड के स्थान पर सामुदायिक सेवा को अधिक उपयुक्त मानते हुए निर्देश दिया कि दोनों अपीलकर्ता एक-एक महीने तक समाजसेवा करेंगे।

अदालत के आदेश के अनुसार, एक अपीलकर्ता को 15 मई से 15 जून तक प्रतिदिन पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच एक वृद्धाश्रम में सामुदायिक सेवा करनी होगी। वहीं, दूसरे अपीलकर्ता को गाजियाबाद स्थित एक बाल देखभाल केंद्र में समान अवधि के लिए सेवा देने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं पर गंभीर आरोप लगाने से पहले ठोस और प्रामाणिक साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है। इस फैसले को जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की विश्वसनीयता के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।