अलविदा जुमा और मसला ईद के चाँद का

Story by  फिदौस खान | Published by  [email protected] | Date 21-04-2023
मसला ईद के चाँद का
मसला ईद के चाँद का

 

फ़िरदौस ख़ान 
 
हर साल ईद को लेकर ये मसला रहता है कि ईद कब है ? जैसे इस बार भी हमारे मुल्क में ये सवाल है कि ईद 22 अप्रैल हो होगी या 23 अप्रैल को. ये सवाल सिर्फ़ हमारे मुल्क हिन्दुस्तान का ही नहीं है, बल्कि दुनिया के तक़रीबन सभी मुल्कों में यही हाल है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि सभी इस्लामी त्यौहार हिजरी कैलेंडर के हिसाब से मनाए जाते हैं.

हिजरी कैलेंडर चांद की रफ़्तार पर आधारित होता है. इसे इस्लामी कैलेंडर भी कहा जाता है. इसमें 12 महीने और  354 या 355 दिन होते हैं. हिजरी महीना 29 या 30 दिन का होता है. किसी को ये मालूम नहीं होता है कि मौजूदा महीना 29 दिन का होगा या 30 दिन का. बस इसी वजह से ईद का दिन तय नहीं होता कि ईद किस दिन होगी. 
   
पृथ्वी सूरज के चारों तरफ़ घूमती है. इसके एक चक्कर को पूरा होने में 365 दिन और तक़रीबन छह घंटे का वक़्त लगता है. अंग्रेज़ी कैलेंडर के मुताबिक़ साल में 365 दिन होते हैं और इन छह घंटे के वक़्त को जोड़कर चौथे साल एक लीप वर्ष हो जाता है. पृथ्वी सूरज के चारों तरफ़ चक्कर लगाने के अलावा अपनी धुरी पर भी घूमती है.
 
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इसी तरह चांद भी पृथ्वी का चक्कर लगाता है. वैजानिकों के मुताबिक़ अगर पृथ्वी अपनी जगह पर ठहर जाए, तो ऐसी हालत में चांद को पृथ्वी के चारों तरफ़ चक्कर लगाने में 27 दिन लगेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है और पृथ्वी अपनी धुरी पर भी मुसलसल घूमती रहती है. इसलिए चांद को पृथ्वी के चारों तरफ़ घूमने में 29 दिन और कुछ घंटों का वक़्त लगता है. अमावास के बाद जिस दिन चांद नज़र आता है, उस दिन को चांद रात कहा जाता है. 
 
फ़रवरी को छोड़कर अंग्रेज़ी कैलेंडर के महीने 30 और 31 दिन के होते हैं, लेकिन हिजरी कैलेंडर के महीने सिर्फ़ 29 और 30 दिन के होते हैं. इसलिए हिजरी कैलेंडर में हर साल 10 दिन का फ़र्क़ आ जाता है. इस वजह से इस्लामी त्यौहार हर साल दस दिन पहले आते हैं.   
 
क़ाबिले ग़ौर बात ये भी है कि इस्लामी तारीख़ और दिन सूरज ढलने के बाद से शुरू होता है. मसलन आज 20 अप्रैल है और दिन गुरुवार का है. रात के बारह बजे के बाद 21 तारीख़ शुरू हो जाएगी और इसके साथ ही दिन शुक्रवार का हो जाएगा.
 
इसके बरअक्स आज हिजरी कैलेंडर के रमज़ान के महीने की 28 तारीख़ है और दिन जुमेरात का है, लेकिन सूरज गु़रूब होते ही इस्लामी तारीख़ बदल जाएगी यानी 29 तारीख़ हो जाएगी और दिन शुक्रवार का हो जाएगा. 
 
अब अगर 29 तारीख़ की शाम को चांद नज़र आ गया, तो ईद का ऐलान कर दिया जाएगा. इस हिसाब से रमज़ान का महीना 29 दिन का कहलाएगा और शव्वाल का महीना शुरू जाएगा. शव्वाल के महीने की पहली तारीख़ को ही ईद उल फ़ित्र मनाई जाती है. अगर चांद नज़र नहीं आया, तो रमज़ान का महीना 30 दिन का हो जाएगा. चूंकि चांद का महीना 29 या 30 दिन का ही होता है, इसलिए चांद देखे बिना भी ईद का ऐलान कर दिया जाता है. 
 
eid
 
अलविदा जुमे का मसला 

अब बात आती है अलविदा जुमे की. अमूमन रमज़ान के महीने में चार ही जुमे आते हैं और आख़िरी जुमे को अलविदा जुमा माना जाता है. बहुत कम ही ऐसा होता है कि रमज़ान में पांच जुमे आ जाएं. जैसे इस बार रमज़ान में पांच जुमे आए हैं.
 
हक़ीक़त में रमज़ान के आख़िरी जुमे को ही अलविदा जुमा कहा जाता है, लेकिन अगर रमज़ान में 29 तारीख़ को जुमेरात हो और ये गुमान हो कि जुमे की 30 तारीख़ हो सकती है, तो फिर रमज़ान के चौथे जुमे को ही अलविदा जुमा कहा जाएगा. इसकी वजह ये है कि अगर 29 तारीख़ को चांद दिख गया, तो इस हिसाब से जुमे के दिन ईद मनाई जाएगी.   
 
क़ाबिले ग़ौर बात ये भी है कि हिजरी कैलेंडर होने के बावजूद इसके हिसाब से कोई भी त्यौहार नहीं मनाया जाता. हिजरी कैलेंडर के मुताबिक़ ईद 22 अप्रैल को है. अगर मुसलमान अपने ही हिजरी कैलेंडर के हिसाब से ईद मनाएं तो हर साल चांद देखने को लेकर जो मसले पैदा होते हैं, वे ख़त्म हो जाएंगे. 
 
आज भी चांद देखने की सदियों पुरानी रिवायत क़ायम है. चांद देखने के लिए बाक़ायदा समितियां बनाई गई हैं. चांद देखने वाली इस समिति को रूयत-ए-हिलाल कमेटी कहा जाता है, जिसमें मुफ़्ती और मौलाना शामिल होते हैं.
 
हिन्दुस्तान में दो अहम चांद समितियां हैं एक सुन्नी फ़िरक़े की है, तो दूसरी शिया फ़िरक़े की है. अमूमन सभी राज्यों में इन चांद समितियों के नुमाइंदे होते हैं. वे क़ौम के दो मुअज़्ज़िज़ लोगों की चांद देखने की गवाही के बाद चांद के बारे में कमेटी के सदर को बताते हैं. फिर इसके बाद ऐलान किया जाता कि चांद नज़र आया है या नहीं.
 
दुनियाभर के अमूमन उन सभी देशों में चांद समितियां हैं, जहां मुसलमान रहते हैं.ईद कब होगी, ये मसला हर साल आन खड़ा होता है. हैरत इस बात की है कि तकनीकी के इस दौर में जब बहुत पहले ही ये मालूम हो जाता है कि सूरज ग्रहण कब होगा और चांद ग्रहण कब होगा, तो चांद कब दिखाई देगा और कब नहीं, तो इसका पता क्यों नहीं लगा लिया जाता.
 
jama masjid
 
ग़ौरतलब है कि इस मसले को लेकर मई 2016 में तुर्की के इस्तांबुल में एक अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ़्रे़स हुई थी, जिसमें तुर्की के अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, जॉर्डन, मलेशिया और मोरक्को सहित तक़रीबन 50 देशों के इस्लामिक विद्वानों ने शिरकत की थी.
 
इस कॉन्फ़्रे़स को इंटरनेशनल हिजरी कैलेंडर यूनियन कांग्रेस कहा जाता है. इसमें इस बात पर ज़ोर दिया गया कि दुनियाभर के मुसलमानों को एक ही दिन ईद मनानी चाहिए. अब सवाल ये भी है कि एक ही वक़्त में दुनिया के किसी देश में दिन है, तो किसी में रात है. ऐसे में एक ही दिन ईद कैसे मनाई जा सकती है?
 
सऊदी अरब के सुप्रीम कोर्ट ने मुल्क के सभी मुसलमानों से अपील की है कि वे गुरुवार की शाम को चांद देखें.अगर चांद दिख जाता है, तो वहां जुमे को ईद होगी. इस हालत में हिन्दुस्तान में शनिवार को ईद होगी. अगर सऊदी अरब में गुरुवार को चांद नहीं दिखा, तो फिर वहां शनिवार को ईद होगी और हमारे मुल्क में इतवार को ईद होगी. 
 
कई बार ऐसा होता है कि किसी जगह चांद नज़र आ जाता है और किसी जगह नहीं. ऐसे हालात में एक ही मुल्क, एक ही सूबे या एक ही शहर में दो दिन ईद मना ली जाती है. गुज़श्ता बरसों में ऐसा हुआ भी है कि एक ही मोहल्ले में दो दिन ईद मनाई गई. किसी ने 29 दिन के रोज़े रखकर ईद मनाई तो किसी ने 30 दिन के रोज़े रखने के बाद ईद मनाई.
 
इन हालात ने निपटने के लिए कोई कारगर क़दम तो उठाना ही होगा, वरना ये मसला यूं ही बरक़रार रहेगा.  
 
(लेखिका आलिमा हैं और उन्होंने फ़हम अल क़ुरआन लिखा है)