पश्चिम एशिया संकट: 20 जुलाई तक भारतीय एयरलाइंस की 26 हजार अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-07-2026
West Asia crisis: 26 thousand international flights of Indian Airlines canceled till July 20
West Asia crisis: 26 thousand international flights of Indian Airlines canceled till July 20

 

नई दिल्ली।

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर भी गहराई से दिखाई देने लगा है। संघर्ष के चलते कई देशों के हवाई क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंधों और सुरक्षा संबंधी पाबंदियों के कारण भारतीय विमानन कंपनियों को 20 जुलाई 2026 तक लगभग 26,000 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में उड़ानों के मार्ग बदले गए हैं और कई विमानों के परिचालन में लंबी देरी भी हुई है।

यह जानकारी नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने गुरुवार को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न अस्थिर स्थिति का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाओं पर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद विमानन कंपनियां यात्रियों की सुरक्षा और सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं।

मंत्री ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया या वहां उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिए। इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय विमानन कंपनियों को बड़ी संख्या में अपनी निर्धारित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कई उड़ानों के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े, जिससे यात्रा का समय बढ़ गया और परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

उन्होंने बताया कि 20 जुलाई 2026 तक भारतीय एयरलाइंस की लगभग 26,000 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। वहीं, जिन उड़ानों का संचालन जारी है, उनमें से अनेक को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। इससे यात्रियों को देरी, अतिरिक्त यात्रा समय और उड़ान कार्यक्रम में बदलाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

सरकार के अनुसार, यह संकट केवल उड़ानों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका आर्थिक प्रभाव भी व्यापक है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक स्तर पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में वृद्धि हुई है। ईंधन महंगा होने और लंबी दूरी तय करने की मजबूरी के कारण एयरलाइंस का परिचालन खर्च तेजी से बढ़ा है। इससे विमानन कंपनियों के राजस्व पर भी गंभीर असर पड़ा है।

लोकसभा में दिए गए जवाब में मंत्री ने कहा कि विमानन कंपनियां मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप अपने परिचालन की लगातार समीक्षा कर रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उड़ानों के समय, मार्ग और संचालन में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं ताकि जोखिम को कम किया जा सके।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए कई सुरक्षा परामर्श (Advisories) जारी किए हैं। इन परामर्शों का उद्देश्य यात्रियों, चालक दल और विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। एयरलाइंस को निर्देश दिए गए हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित देशों के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए उड़ानों का संचालन करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर वैश्विक विमानन उद्योग पर और अधिक गहरा हो सकता है। उड़ानों की लागत बढ़ने, टिकटों के महंगे होने और अंतरराष्ट्रीय यात्रा कार्यक्रमों में लगातार बदलाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल सरकार और विमानन कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और यात्रियों से यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जानकारी संबंधित एयरलाइन से अवश्य प्राप्त करने की अपील की गई है।