FY27 में भारतीय बैंकों की मुनाफे में बढ़ोतरी के आसार: BCG

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 27-10-2026
Strong credit demand, margin recovery to support Indian banks' profitability in FY27: BCG
Strong credit demand, margin recovery to support Indian banks' profitability in FY27: BCG

 

नई दिल्ली 
 
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों से चुनौतियां पैदा होने के बावजूद, भारत के बैंकिंग क्षेत्र में वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भी मजबूत लाभप्रदता (profitability) बनी रहने की उम्मीद है।रिपोर्ट में कहा गया है, "क्रेडिट की मांग, मार्जिन में सुधार और अच्छी एसेट क्वालिटी, वित्त वर्ष 2027 के लिए मजबूत लाभप्रदता की संभावनाओं को समर्थन देते हैं।"
 
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के कुल व्यापार में पश्चिम एशिया (West Asia) की हिस्सेदारी 14-20 प्रतिशत है। ऐसे में, तेल की बढ़ती कीमतें चालू खाता घाटे (CAD) को बढ़ा सकती हैं, महंगाई को बढ़ावा दे सकती हैं और खपत (consumption) को कमजोर कर सकती हैं, जिससे कई क्षेत्रों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। इसका बैंकिंग क्षेत्र की क्रेडिट ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है और विभिन्न क्षेत्रों में लोन के 'स्लिपेज' (यानी लोन का एनपीए में बदलना) में वृद्धि हो सकती है।
 
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि "वित्त वर्ष 2027 तक क्रेडिट ग्रोथ अच्छी बनी रहनी चाहिए। जीएसटी दरों में कटौती से खपत बढ़ेगी, सरकारी पूंजीगत व्यय (capex) से कॉर्पोरेट लोन की मांग बनी रहेगी, और ECLGS 5.0 योजना से मिड-मार्केट लोन को बढ़ावा मिलेगा।" रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1) में बैंकिंग क्षेत्र में 'नेट एडवांसेज' (कुल दिए गए लोन) में सालाना आधार पर (YoY) 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें कॉर्पोरेट और अन्य लोन में 20 प्रतिशत, MSME लोन में 19 प्रतिशत, कृषि लोन में 18 प्रतिशत और रिटेल लोन में 14 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। इस दौरान क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) अनुपात 85 प्रतिशत रहा।
 
दूसरी ओर, कुल जमा राशि (deposits) में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसमें चालू खाता और बचत खाता (CASA) जमा में 10.1 प्रतिशत और टर्म डिपॉजिट में 12.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। हालांकि, बैंकिंग उद्योग का CASA अनुपात वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के 36.1 प्रतिशत से घटकर 35.5 प्रतिशत रह गया। रिपोर्ट में कहा गया है, "डिपॉजिट की ग्रोथ क्रेडिट की तुलना में धीमी है और CASA का अनुपात भी लगातार गिर रहा है। फिर भी, फंड की लागत (cost of funds) कम होने से NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) में बढ़ोतरी होनी चाहिए, क्योंकि टर्म डिपॉजिट की रीप्राइसिंग (ब्याज दरों का पुनर्मूल्यांकन) कम दरों पर होगी।" इसके अलावा, इसमें वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में भारत के बैंकिंग क्षेत्र को आकार देने वाले प्रमुख रुझानों पर प्रकाश डाला गया है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपनाए जाने में हो रही वृद्धि और फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) [FCNR(B)] डिपॉजिट में आए बदलाव शामिल हैं।
 
इसमें बताया गया है कि हालांकि बैंकिंग के मुख्य कार्यों में AI का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन गवर्नेंस, बोर्ड की निगरानी, ​​मॉडल की मॉनिटरिंग और ऑडिट की व्यवस्था अभी भी अपर्याप्त बनी हुई है। दूसरी ओर, रेगुलेटरी नियमों में दी गई ढील से FCNR(B) डिपॉजिट का इनफ्लो मजबूत हुआ है, जिससे अब ध्यान लिक्विडिटी मैनेजमेंट और 2029-31 के लिए रीपेमेंट प्लानिंग की ओर शिफ्ट हो गया है। साथ ही, मजबूत प्रोविजन कवरेज और कम क्रेडिट कॉस्ट की वजह से इस क्षेत्र की प्रॉफिटेबिलिटी बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेगमेंट में बढ़ता दबाव एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।