RBI के फैसले के बाद PNB ने बढ़ाईं FCNR(B) जमा दरें

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 10-06-2026
PNB hikes FCNR(B) deposit rates following RBI's decision.
PNB hikes FCNR(B) deposit rates following RBI's decision.

 

नई दिल्ली।

विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में घोषित उपायों के बाद देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक Punjab National Bank (PNB) ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी बैंक [FCNR(B)] जमा योजनाओं पर ब्याज दरों में वृद्धि की घोषणा की है। बैंक अब इस योजना के तहत अधिकतम 6.10 प्रतिशत तक ब्याज देगा और उसे उम्मीद है कि इससे लगभग 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर की नई जमा राशि आकर्षित की जा सकेगी।

पीएनबी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक Ashok Chandra ने बताया कि बैंक की एसेट लाइबिलिटी कमेटी (ALCO) की बैठक में नई ब्याज दरों को अंतिम रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि तीन, चार और पांच वर्ष की अवधि वाली एफसीएनआर(बी) जमा योजनाओं के लिए आकर्षक दरें तय की गई हैं, जिससे अनिवासी भारतीयों (NRI) को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

अशोक चंद्रा के अनुसार, एक मिलियन डॉलर तक की एफसीएनआर(बी) जमा पर तीन वर्ष की अवधि के लिए 6 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा। चार वर्ष की अवधि वाली जमा पर यह दर 6.05 प्रतिशत होगी, जबकि पांच वर्ष की अवधि के लिए बैंक 6.10 प्रतिशत का ब्याज प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ये दरें बेहद प्रतिस्पर्धी हैं। उनका मानना है कि अमेरिका सहित कई विकसित देशों में सरकारी प्रतिभूतियों पर मिलने वाला प्रतिफल इससे काफी कम है। ऐसे में भारतीय बैंकिंग प्रणाली, विशेषकर एफसीएनआर(बी) योजनाएं, एनआरआई निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती हैं।

पीएनबी प्रमुख ने कहा कि बैंक को उम्मीद है कि संशोधित ब्याज दरों के आधार पर वह लगभग 2.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा जुटाने में सफल रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि पूरे बैंकिंग क्षेत्र को देखा जाए तो एफसीएनआर(बी) मार्ग के जरिए 35 से 40 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकता है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब Reserve Bank of India ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और देश के बाह्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में बैंकों द्वारा जुटाई जाने वाली नई एफसीएनआर(बी) जमा राशियों को नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) की अनिवार्यताओं से अस्थायी रूप से छूट देने का फैसला किया है।

आरबीआई के अनुसार, यह छूट उन नई एफसीएनआर(बी) जमाओं पर लागू होगी जिनकी अवधि न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष होगी तथा जिन्हें 30 सितंबर 2026 तक जुटाया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य बैंकों को अधिक विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई की नई नीति और बैंकों द्वारा बढ़ाई गई ब्याज दरों का संयुक्त प्रभाव भारतीय बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेगा। इससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर रहने वाले भारतीयों को भी अपने धन पर बेहतर प्रतिफल प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

बैंकिंग क्षेत्र को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में एनआरआई निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।