IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 24-09-2026
IRDAI proposes overhaul of insurance distribution, tighter cost limits and safeguards against mis-selling
IRDAI proposes overhaul of insurance distribution, tighter cost limits and safeguards against mis-selling

 

नई दिल्ली 
 
इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसमें आसान तीन-स्तरीय ढांचा, कम खर्च की सीमा, नए कमीशन स्ट्रक्चर और गलत तरीके से बिक्री (mis-selling) के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। इसका मकसद डिस्ट्रीब्यूशन की लागत कम करना और पॉलिसीहोल्डर्स के लिए पारदर्शिता बढ़ाना है। इंश्योरेंस रेगुलेटर ने "इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के इकोनॉमिक्स को फिर से तय करने" पर एक पब्लिक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसमें डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रक्चर, खर्च, कमीशन, मार्केट कंडक्ट, पारदर्शिता और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल से जुड़े सुधारों की रूपरेखा दी गई है। इन प्रस्तावों का मकसद एक ऐसा इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन इकोसिस्टम बनाना है जो कस्टमर पर केंद्रित, कॉम्पिटिटिव और कम लागत वाला हो।
 
प्रस्तावित ढांचे के तहत, IRDAI मौजूदा बिखरे हुए डिस्ट्रीब्यूशन ढांचे को तीन मुख्य कैटेगरी में बदलने की योजना बना रहा है — इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटीज (IDEs), इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन पर्सन्स (IDPs) और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs)।
IRDAI ने कहा, "प्रस्तावित डिस्ट्रीब्यूशन ढांचा 'एक जैसा स्ट्रक्चर, एक जैसे काम, एक जैसे नियम' के सिद्धांत पर आधारित है।" रेगुलेटर ने आसान रजिस्ट्रेशन, एंट्री और कैपिटल की ज़रूरतों में काफी कमी और रेगुलेटरी फीस कम करने का भी प्रस्ताव दिया है। डिस्ट्रीब्यूटर्स को इंश्योरेंस के साथ-साथ दूसरी फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल गतिविधियां करने की ज़्यादा आज़ादी मिलेगी, जिससे छोटे मार्केट सहित अतिरिक्त बिज़नेस और कमाई के मौके खुल सकते हैं।
 
प्रस्तावित सुधारों का एक अहम हिस्सा इंश्योरेंस कंपनियों के 'एक्सपेंस ऑफ़ मैनेजमेंट' (EoM) की सीमा में कमी करना है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, EoM की सीमा 'ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम' (GDPI) से जुड़ी कंपनी-लेवल की सीमा में बदल जाएगी। इसके तहत दो साल के भीतर सीमा 15 प्रतिशत और पांच साल के भीतर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
 
जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के लिए, कैलकुलेशन 'ग्रॉस रिटन प्रीमियम' (GWP) से घरेलू GDPI में बदल जाएगी, जबकि EoM की सीमा पांच साल के भीतर GWP के 30 प्रतिशत से घटकर GDPI के 20 प्रतिशत हो जाएगी। रेगुलेटर ने कहा, "EoM में प्रस्तावित कमी का मकसद इंश्योरेंस की कुल लागत को कम करना है, जिससे जनरल इंश्योरेंस में उपलब्ध रिस्क पूल का विस्तार हो सके और लाइफ सेविंग्स प्रोडक्ट्स में पॉलिसीहोल्डर्स को बेहतर रिटर्न मिल सके।" IRDAI ने एक जैसा तरीका अपनाने के बजाय, सेगमेंट, बिज़नेस लाइन, डिस्ट्रीब्यूशन चैनल, प्रोडक्ट की जटिलता और प्रोडक्ट को बेचने और सर्विस देने में लगने वाली मेहनत के आधार पर कमीशन को फिर से तय करने का प्रस्ताव दिया है। ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों और शहरों जैसे कम सेवा वाले इलाकों में प्रोडक्ट बेचने वाले डिस्ट्रीब्यूटर को सामान्य कमीशन लिमिट से ज़्यादा इनाम मिल सकते हैं।
 
कंसल्टेशन पेपर में गलत तरीके से बिक्री (mis-selling) और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट के साथ इंश्योरेंस की अनिवार्य बंडलिंग को रोकने के लिए कड़े उपाय भी सुझाए गए हैं। इनमें कस्टमर की ज़रूरतों और उपयुक्तता का डॉक्यूमेंटेशन करना, डायरेक्ट और इनडायरेक्ट पेमेंट को कमीशन की रेगुलेटरी परिभाषा में लाना, और इंश्योरेंस बेचने वाले बैंक और NBFC कर्मचारियों के लिए वॉल्यूम-लिंक्ड या रिवॉर्ड-लिंक्ड इंसेंटिव पर रोक लगाना शामिल है।
 
IRDAI ने हर पॉलिसी के साथ व्यक्तिगत सेलर की पहचान को जोड़ने, गलत बिक्री की घटनाओं की जानकारी पब्लिक डोमेन में डालने और गलत बिक्री के मामलों में कमीशन वापस लेने (claw-back) की अनुमति देने का भी प्रस्ताव दिया है। IRDAI ने कहा, "पॉलिसीहोल्डर्स की सही जानकारी के साथ चुनाव करने की क्षमता को मज़बूत करने के लिए ज़्यादा पारदर्शिता और मज़बूत जवाबदेही का प्रस्ताव दिया गया है।"
 
डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन पर, रेगुलेटर ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए डिजिटल, पुल-बेस्ड विकल्पों के तौर पर MIIs का प्रस्ताव दिया है, जिसमें 'बीमा सुगम' को ऐसे ही एक इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर पहचाना गया है। यह तुलना, पोर्टेबिलिटी, पारदर्शिता और ऑपरेशनल दक्षता को सपोर्ट करने के लिए पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री (PIR) के ज़्यादा इस्तेमाल की भी कल्पना करता है। IRDAI ने प्रस्तावित सुधारों पर जनता और स्टेकहोल्डर्स से 25 अक्टूबर, 2026 तक राय मांगी है।