India's digital infrastructure among world's 10 highly effective reforms: CareEdge
नई दिल्ली
केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स (CareEdge Global Ratings) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) दुनिया के 10 सबसे प्रभावी संरचनात्मक सुधारों में से एक बनकर उभरा है। इसमें आधार की व्यापक पहुंच, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजेक्शन का बड़ा पैमाना और व्यवसायों द्वारा डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग का अहम योगदान है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाई है, ट्रांजेक्शन की लागत कम की है, और वित्तीय समावेशन (financial inclusion) तथा अर्थव्यवस्था के औपचारिक रूप लेने (economic formalisation) में मदद की है।
इस रिपोर्ट में 38 देशों के 43 सुधारों का अध्ययन किया गया और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को 10 सबसे प्रभावी सुधारों में शामिल किया गया। भारत के आधार सिस्टम में 1.3 अरब से अधिक लोग शामिल हैं, जो कुल आबादी का लगभग 95 प्रतिशत है। वहीं, UPI के जरिए हर महीने 13 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन होते हैं, जो देश के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क के विशाल पैमाने को दर्शाते हैं। रिपोर्ट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के बीच डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला गया है; उनके कुल ट्रांजेक्शन में से 85 प्रतिशत से अधिक डिजिटल माध्यम से होते हैं। यह दर्शाता है कि व्यवसाय अब औपचारिक अर्थव्यवस्था (formal economy) से और अधिक गहराई से जुड़ रहे हैं।
केयरएज ग्लोबल रेटिंग्स के चीफ रेटिंग ऑफिसर नितेश जैन ने कहा, "भारत का DPI इसलिए खास है क्योंकि यह उन बुनियादी कमियों को दूर करता है, जिन्होंने लंबे समय तक औपचारिक अर्थव्यवस्था की पहुंच को सीमित रखा था - जैसे कि कैश पर निर्भरता, बैंकिंग और औपचारिक क्रेडिट तक सीमित पहुंच, और बड़े पैमाने पर वित्तीय सेवाएं व कल्याणकारी लाभ पहुंचाने के लिए अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर। इस सुधार की अहमियत एक ऐसा साझा डिजिटल आधार तैयार करने में है, जो एक साथ कई आर्थिक और प्रशासनिक कार्यों को पूरा कर सकता है।"
रिपोर्ट में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता के पीछे संस्थागत समन्वय (institutional coordination) और इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability) को महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। सरकारी एजेंसियों, नियामकों, बैंकों, पेमेंट नेटवर्क और फिनटेक कंपनियों के बीच आपसी सहयोग ने इसके विकास और उपयोग को बढ़ावा दिया है।
अध्ययन किए गए 43 सुधारों में से 10 को 'बेहद प्रभावी', 9 को 'काफी हद तक प्रभावी', 15 को 'प्रक्रियाधीन' (काम चल रहा है) और 9 को 'सबसे कम प्रभावी' की श्रेणी में रखा गया। 10 सबसे प्रभावी सुधारों में से 8 यूरोप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र से हैं, जिनमें से प्रत्येक क्षेत्र के 4-4 सुधार शामिल हैं। अन्य अत्यंत प्रभावी सुधारों में ग्रीस में करों का डिजिटलीकरण, जर्मनी का ऋण कर नियंत्रण, साइप्रस में बैंकिंग सुधार और फिलीपींस में प्रोजेक्ट रिपील शामिल हैं।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि केवल सुधारों की घोषणा करना ही स्थायी परिणाम देने के लिए पर्याप्त नहीं है। प्रभावी सुधारों के लिए सुसंगत नीतिगत रूपरेखा, उचित क्रम, स्पष्ट जनादेश, राजनीतिक प्रतिबद्धता और हितधारकों का समर्थन आवश्यक है। इनकी सफलता अंततः विश्वसनीय कार्यान्वयन और मापने योग्य सुधारों पर निर्भर करती है।
इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता में प्रगति, डिजिटल अवसंरचना की आवश्यकताएं, जलवायु जोखिम, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां और आपूर्ति श्रृंखलाओं सहित उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए भविष्य के सुधारों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।