China's solar curbs may accelerate India's push for domestic wafer and cell manufacturing: Report
नई दिल्ली
JM फाइनेंशियल की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन द्वारा 12 सोलर फोटोवोल्टिक (PV) निर्माण तकनीकों के निर्यात पर प्रस्तावित प्रतिबंध, भारत को सोलर वेफर, सेल और इंगोट के क्षेत्र में अपनी घरेलू क्षमताएं विकसित करने की दिशा में और तेजी लाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 16 अक्टूबर को 'निर्यात के लिए प्रतिबंधित या सीमित तकनीकों की सूची' (Catalogue of Technologies Prohibited or Restricted from Export) में 12 सोलर PV निर्माण तकनीकों को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है।
इस प्रस्ताव में पॉलीसिलिकॉन, सिलिकॉन वेफर और सोलर सेल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली तकनीकें, और इन तकनीकों से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरण शामिल हैं। इस प्रस्ताव में तकनीकों को 'प्रतिबंधित' और 'सीमित' श्रेणियों में बांटा गया है। संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) को 15 नवंबर, 2026 तक इस पर अपनी राय (फीडबैक) देने के लिए आमंत्रित किया गया है। JM फाइनेंशियल की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम से भारत के लिए घरेलू सोलर विनिर्माण (manufacturing) को विस्तार देने का आधार मजबूत हो सकता है, खासकर उत्पादन श्रृंखला (production chain) के शुरुआती चरणों में। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि ऐसा मान लेना सही नहीं होगा कि सभी TOPCon प्रोडक्शन लाइनें, चीनी मशीनरी या तकनीक का हस्तांतरण अपने आप प्रतिबंधित हो जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है, "हम इसे भारतीय सोलर विनिर्माण के लिए संरचनात्मक रूप से सकारात्मक मानते हैं (इससे 'बैकवर्ड इंटीग्रेशन' में तेजी आ सकती है), हालांकि अल्पकाल में कुछ रुकावटें आ सकती हैं।" सोलर विनिर्माण के लिए जरूरी कई चीजों, जैसे विशेष उत्पादन उपकरण, औद्योगिक गैसें और रसायन, स्पेयर पार्ट्स, प्रोसेस सॉफ्टवेयर और कुशल इंजीनियरों के लिए भारत अभी भी चीन पर निर्भर है। यह निर्भरता प्रस्तावित प्रतिबंधों को निकट भविष्य में क्षमता विस्तार के लिए एक जोखिम बना सकती है, भले ही ये प्रतिबंध घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को विकसित करने के महत्व को और बढ़ा देते हैं।
JM फाइनेंशियल ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा, "सबसे बड़ा अवसर उत्पादन श्रृंखला के शुरुआती चरणों (upstream) में जाने में है, लेकिन यहीं पर तकनीकी और क्रियान्वयन संबंधी सबसे बड़ी बाधाएं भी मौजूद हैं।" रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जरूरी नहीं कि इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत की सबसे बड़ी सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माता कंपनियों को ही मिले। जो कंपनियां मॉड्यूल असेंबली से तेजी से आगे बढ़कर सोलर सेल, वेफर और इंगोट के उत्पादन की ओर बढ़ सकती हैं, वे बदलते व्यापारिक माहौल का लाभ उठाने के लिए बेहतर स्थिति में हो सकती हैं।
इस घटनाक्रम का असर नई सोलर विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की लागत पर भी पड़ सकता है। उपकरणों की आपूर्ति में देरी होने या यूरोपीय विक्रेताओं से अधिक महंगे उपकरण खरीदने की जरूरत पड़ने पर विनिर्माण लागत बढ़ सकती है। इसके परिणामस्वरूप, घरेलू बाजार में सोलर सेल और मॉड्यूल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अगर घरेलू कीमतें काफी बढ़ जाती हैं, तो भारत दिसंबर 2026 के बाद भी ALMM-II नियमों में और ढील दे सकता है। साथ ही, चीनी निर्यातक सेल और मॉड्यूल जैसे तैयार सोलर उत्पादों की कीमतों को लेकर और अधिक आक्रामक हो सकते हैं, जिससे ये भारतीय डेवलपर्स के लिए और भी आकर्षक बन सकते हैं।