AI deals seen driving medium-term growth as Indian IT sector faces muted Q2: Report
नई दिल्ली
सेंट्रम की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के IT सर्विस सेक्टर में वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सुस्त प्रदर्शन देखने को मिल सकता है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी डील्स में बढ़ती दिलचस्पी मध्यम अवधि में ग्रोथ को सहारा दे सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन महीनों में डिमांड का माहौल मोटे तौर पर वैसा ही बना हुआ है; क्लाइंट्स AI को अपनाने को लेकर सतर्क हैं और फैसले लेने में लगने वाला लंबा समय निकट भविष्य की ग्रोथ पर असर डाल रहा है। साथ ही, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि ज़्यादातर IT सर्विस कंपनियों के पास मज़बूत पाइपलाइन होने के कारण डील बुकिंग अच्छी बनी रहेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है, "मध्यम अवधि में AI-आधारित डील्स अतिरिक्त बिज़नेस ग्रोथ के लिए अहम कारक होंगी।" इसमें बताया गया है कि मौजूदा AI टेक्नोलॉजी साइकल भारतीय IT सर्विस कंपनियों के लिए नए मौके पैदा कर सकता है। उम्मीद है कि AI-आधारित सर्विस मार्केट 2030 तक 300-400 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा।
हालांकि, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि निकट भविष्य में टियर-1 IT कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ सुस्त रहेगी। अनुमान है कि Q2FY27 में US डॉलर के हिसाब से रेवेन्यू ग्रोथ TCS के लिए 0.4%, इन्फोसिस के लिए 1.1%, HCL टेक के लिए 1.9%, टेक महिंद्रा के लिए 1.3% रहेगी, जबकि विप्रो में 0.6% की गिरावट आ सकती है।
टियर-2 कंपनियों में, रिपोर्ट के अनुसार US डॉलर के हिसाब से LTIMindtree में 1.1%, L&T टेक्नोलॉजी सर्विसेज़ में 1.7%, कोफोर्ज (Coforge) में 3.1% (ऑर्गेनिक रूप से), पर्सिस्टेंट सिस्टम्स में 6%, Mphasis में 1.9% और हैप्पिएस्ट माइंड्स में 2.3% की ग्रोथ हो सकती है। इसके अलावा, सेंट्रम ने कहा कि हाल ही में हुई डील्स मुख्य रूप से लागत कम करने (cost optimisation) और वेंडर कंसोलिडेशन पर केंद्रित हैं, जबकि कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का रेवेन्यू में बदलना अभी भी धीमा है, जिससे पता चलता है कि डील्स धीरे-धीरे बढ़ रही हैं।
इसमें बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज़ और इंश्योरेंस (BFSI) और टेक्नोलॉजी सेक्टर में वैकल्पिक टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending) में मामूली सुधार भी देखा गया, हालांकि मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव सेक्टर में खर्च अभी भी कमज़ोर बना हुआ है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि Q2FY27 में पूरे सेक्टर के ऑपरेटिंग मार्जिन मोटे तौर पर स्थिर रहेंगे। इसकी वजह इस तिमाही के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 1% की गिरावट है, हालांकि AI में निवेश से इस पर कुछ असर पड़ सकता है।
IT कंपनियां AI टूल्स के ज़्यादा इस्तेमाल, ज़्यादा यूटिलाइज़ेशन और अपने एम्प्लॉई मिक्स में बदलाव के ज़रिए मार्जिन बेहतर करने की कोशिश भी कर रही हैं। आगे बढ़ते हुए, सेंट्रम ने कहा कि डिमांड, FY27 रेवेन्यू और मार्जिन गाइडेंस, ऑफशोरिंग, हायरिंग और डील बुकिंग पर मैनेजमेंट की कमेंट्री अहम होगी। उसे उम्मीद है कि AI से जुड़ी डील्स में बढ़ती दिलचस्पी के कारण FY27 में सेक्टर का आउटलुक धीरे-धीरे बेहतर होगा।