यूनुस अल्वी/ नूंह -मेवात (हरियाणा)
सफलता की राह कभी आसान नहीं होती, खासकर जब आप उन ज़मीनों से निकलें जिन्हें देश के सबसे पिछड़े इलाक़ों में गिना जाता है। अभावों के बीच पलकर, हर कठिनाई से लड़कर, कामयाबी की मंजिल तय करने में कितना धैर्य और समर्पण चाहिए, यह बात नीति आयोग के देश के सौ सबसे पिछड़े जिलों में से एक, हरियाणा के नूंह (मेवात) की धरती से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर चमकने वाले सितारों की कहानी जानकर समझी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय धावक परवेज़ अहमद के बाद, इस बार यह करिश्मा कर दिखाया है नूंह जिले के शाहबाज़ अहमद ने। भारतीय क्रिकेट टीम की टी20 टीम में अचानक उनकी एंट्री ने पूरे ज़िले को गर्व और प्रसन्नता से भर दिया है। खिलाड़ी तो अपार प्रसन्नता में डूबा हुआ है ही, पूरा नूंह ज़िला आज सीना चौड़ा कर घूम रहा है। यह सिर्फ़ एक खिलाड़ी की वापसी नहीं, बल्कि मेवात के उन तमाम युवाओं के सपनों को मिली उड़ान है जो आज भी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

शाहबाज़ अहमद की यह कहानी, विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले जज़्बे को दर्शाती है। शाहबाज़ का जन्म हरियाणा के मेवात (जो 2018 की एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत का सबसे पिछड़ा जिला था) में हुआ था। उन्होंने एक बल्लेबाज़ के रूप में शुरुआत की और मेवात और उसके आसपास के इलाक़ों में स्थानीय क्रिकेट खेला, लेकिन यहां अवसर सीमित थे। सुविधाओं की कमी, संसाधनों का अभाव और क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंचने की मुश्किल राह—ये तमाम चुनौतियां थीं जिनसे शाहबाज़ को गुज़रना पड़ा।
लेकिन शाहबाज़ में कुछ कर दिखाने का जुनून था। इसी जुनून के सहारे, 2015 में, शाहबाज़ ने क्लब क्रिकेट में अपनी किस्मत आज़माने के लिए कोलकाता का रुख किया। यह एक बड़ा फ़ैसला था, अपने घर-परिवार को छोड़कर एक नई राह पर निकलना। कोलकाता पहुंचकर उन्होंने अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी को निखारा और खुद को एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया। यह उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वह भारतीय क्रिकेट टीम के दरवाज़े तक पहुंचे हैं।

हाल ही में, भारतीय टीम के ऑलराउंडर अक्षर पटेल बीमारी की वजह से साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ के शेष दो मुक़ाबलों से बाहर हुए, और पुरुष चयन समिति ने लखनऊ और अहमदाबाद में होने वाले टी20 मुक़ाबलों के लिए शाहबाज़ अहमद को उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर टीम में शामिल किया।
यह शाहबाज़ के लिए सिर्फ़ एक मौक़ा नहीं, बल्कि 800 दिन बाद टीम इंडिया में वापसी का क्षण था। 31 वर्षीय यह खिलाड़ी अब तक 3 वनडे और 2 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। उन्होंने आख़िरी बार भारत के लिए एशियन गेम्स में 2023 में खेला था।
शाहबाज़ का क्रिकेट रिकॉर्ड भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। बाएं हाथ के स्पिनर ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद ने अब तक कुल 114 टी20 मुक़ाबले खेले हैं, जिनमें उन्होंने 1355 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और 4 अर्धशतक शामिल हैं।
गेंद से भी कमाल दिखाते हुए उन्होंने 73 विकेट चटकाए हैं। आईपीएल में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है; वह आरसीबी (2020-2023), सनराइजर्स हैदराबाद और आईपीएल 2025 में लखनऊ सुपर जायंट्स की तरफ से खेले। आईपीएल के 58 मैचों में उन्होंने 545 रन बनाए और 22 विकेट झटके।
इस चयन से पूर्व, शाहबाज़ तावड़ू के एसपीएल क्रिकेट ग्राउंड पर लगातार अभ्यास कर रहे थे। वे दिन-रात मेहनत में जुटे हुए थे और स्थानीय युवा क्रिकेटरों के साथ बल्लेबाजी और गेंदबाजी का अभ्यास कर रहे थे।
एसपीएल क्रिकेट ग्राउंड के संचालक राशीद अहमद ने शाहबाज़ को एक होनहार मेवाती क्रिकेटर बताते हुए कहा, "वे बेहद मेहनती हैं और एक भी दिन अभ्यास नहीं छोड़ते। उनका चयन मेवात और विशेष रूप से तावड़ू के लिए गर्व की बात है।"
शाहबाज़ के चाचा और कोच, मास्टर फारूक को अपने भतीजे पर गर्व है। शाहबाज़ के टी20 टीम में चयन होने पर उन्होंने स्कूल में लड्डू खिलाकर ख़ुशी का इज़हार किया।
स्कूल स्टाफ के साथी शिक्षक विनोद शास्त्री (महेंद्रगढ़) ने कहा, "मेवात को अक्सर पिछड़ा इलाका माना जाता है, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें जो भाईचारा और अपनापन मिला, वह कहीं और देखने को नहीं मिलता।
सुविधाओं की कमी के बावजूद यहां के बच्चे अपनी मेहनत से इलाके और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। गर्व है कि साथी शिक्षक के भतीजे, लेफ्ट आर्म स्पिन ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद का चयन भारतीय टीम में हुआ है।"

शाहबाज़ अहमद आज मेवात क्षेत्र, जो अब नूंह जिले के अंतर्गत आता है, से संबंध रखने वाले एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। उनका चयन न सिर्फ़ उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि प्रतिभा किसी भी अभाव की मोहताज नहीं होती। यह कहानी नूंह-मेवात के उन हज़ारों बच्चों को एक संदेश देती है कि अगर मन में लगन हो, और कठिन परिश्रम करने की क्षमता हो, तो भारत के सबसे पिछड़े ज़िले से निकलकर भी राष्ट्रीय पटल पर चमका जा सकता है। शाहबाज़ अहमद सिर्फ़ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि मेवात की उम्मीदों का नया सितारा हैं।