वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे जल्द समझौता करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को “जल्दी समझदारी दिखानी चाहिए” और एक गैर-परमाणु समझौते पर सहमत होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान अब तक किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सका है और उसे जल्द निर्णय लेना होगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी को और लंबा खींचने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर असर डालकर उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर सकता है। हालांकि, इस रणनीति के साथ जोखिम भी जुड़े हैं, क्योंकि इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि वह इस दबाव का सामना करने में सक्षम है। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने वैकल्पिक व्यापार मार्ग तैयार कर लिए हैं और देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप नहीं होगी। इसके बावजूद, युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों का असर साफ नजर आ रहा है।
ईरान की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महज दो दिनों में इसकी कीमत करीब 15 प्रतिशत तक गिर गई है। इसके साथ ही देश में महंगाई दर भी 65 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है, जो आम जनता के लिए गंभीर संकट का संकेत है।
इस पूरे संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। खासकर ऊर्जा क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
वहीं, अमेरिका के भीतर भी ट्रंप पर इस युद्ध को समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है। हालिया सर्वेक्षणों में उनकी लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे राजनीतिक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
ईरान ने हाल ही में एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें युद्ध समाप्त होने के बाद परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात कही गई थी। लेकिन अमेरिका इस मुद्दे को शुरुआत से ही चर्चा में शामिल करने पर जोर दे रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है और आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।