न्यूयॉर्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद वह NATO के साथ अपने संबंधों की समीक्षा कर सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस बारे में अहम बयान देते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ रिश्तों पर फिर से सोचने के लिए मजबूर किया है।
फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका नाटो के साथ अपने संबंधों के महत्व का पुनर्मूल्यांकन करेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लेंगे।
दरअसल, पिछले महीने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के बाद अमेरिका चाहता था कि नाटो देश भी इस संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाएं। हालांकि, नाटो ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिससे वॉशिंगटन और उसके पारंपरिक सहयोगियों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन इस सैन्य गठबंधन के साथ अपने संबंधों को लेकर अब नई रणनीति पर विचार कर रहा है।
नाटो की स्थापना 1949 में हुई थी और वर्तमान में इसमें 32 सदस्य देश शामिल हैं। यह संगठन अपने सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसका सबसे महत्वपूर्ण आधार अनुच्छेद 5 है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है।
इतिहास में यह अनुच्छेद केवल एक बार लागू किया गया है, जब 2001 में अमेरिका पर 9/11 आतंकी हमले हुए थे। उस समय नाटो देशों ने मिलकर अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई की थी। लेकिन मौजूदा ईरान संकट के दौरान नाटो की निष्क्रियता ने अमेरिका को असहज कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में नाटो के साथ अपने संबंधों में बदलाव करता है, तो इसका वैश्विक सुरक्षा ढांचे पर गहरा असर पड़ सकता है। इससे पश्चिमी देशों के बीच रणनीतिक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।
फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि युद्ध के बाद अमेरिका किस दिशा में कदम बढ़ाता है और क्या वह अपने पुराने सहयोगियों के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करता है।