अरब सागर में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की नौसैनिक तैनाती, यमन में संघर्ष के बीच सुरक्षा बढ़ाने का दावा

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 03-01-2026
The Saudi-led coalition's naval deployment in the Arabian Sea is claimed to enhance security amidst the conflict in Yemen.
The Saudi-led coalition's naval deployment in the Arabian Sea is claimed to enhance security amidst the conflict in Yemen.

 

रियाद

यमन में जारी राजनीतिक और सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने अरब सागर में अपने नौसैनिक बलों की तैनाती की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब यमन में सऊदी समर्थित सरकार और अलगाववादी समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के बीच संघर्ष तेज़ होता जा रहा है। गठबंधन ने शुक्रवार, 2 जनवरी को इस तैनाती की जानकारी सार्वजनिक की।

हालांकि सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के आंतरिक संघर्ष पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन उसने कहा कि अरब सागर में यह तैनाती तस्करी विरोधी अभियानों के तहत की गई है। गठबंधन का दावा है कि इस कदम का उद्देश्य समुद्री सीमाओं की निगरानी को मज़बूत करना और क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखना है।

गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के ज़रिये कहा कि नौसैनिक बलों की तैनाती से समुद्री गतिविधियों पर पैनी नज़र रखी जा सकेगी और अवैध हथियारों व अन्य तस्करी को रोका जा सकेगा। उन्होंने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक आवश्यक कदम बताया।

इस बीच, यमन से जुड़ी ज़मीनी स्थिति भी लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। हरदामौत प्रांत के गवर्नर ने दावा किया है कि सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने यमन के सबसे बड़े प्रांत हरदामौत में अलगाववादियों के सबसे बड़े गढ़ पर कब्जा कर लिया है। उनके मुताबिक सरकारी बलों ने अल-खासात इलाके में स्थित ब्रिगेड 37 के सैन्य अड्डे पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिसे हरदामौत का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है।

गवर्नर ने बताया कि इससे पहले शुक्रवार को हरदामौत में एक “शांतिपूर्ण अभियान” शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर हालात बिगड़ गए। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब ने अल-खासा सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और करीब 20 अन्य घायल हो गए।

यमन में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और अरब सागर में नौसैनिक तैनाती को विशेषज्ञ क्षेत्रीय अस्थिरता के व्यापक संकेत के रूप में देख रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम न केवल यमन संकट से जुड़ा है, बल्कि लाल सागर और अरब सागर में रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब यमन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय पहले ही गहरी चिंता जता चुका है और मानवीय संकट के और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
स्रोत: अल जज़ीरा