यमन के आसमान में फिर गरजे सऊदी लड़ाकू विमान: क्षेत्रीय संघर्ष, गठबंधन की दरारें और दक्षिण यमन की नई जंग

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 04-01-2026
Saudi fighter jets roar again in Yemeni skies: Regional conflict, alliance cracks, and a new war in southern Yemen.
Saudi fighter jets roar again in Yemeni skies: Regional conflict, alliance cracks, and a new war in southern Yemen.

 

यमन में जारी लंबे और जटिल गृहयुद्ध के बीच शनिवार को एक बार फिर हालात उस समय और गंभीर हो गए, जब सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने यमन के मुकाला बंदरगाह शहर और उसके आसपास के इलाकों में हवाई हमले किए। इन हमलों का निशाना यमन के दक्षिणी हिस्से में सक्रिय अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) का एक सैन्य शिविर और उससे जुड़े अन्य क्षेत्र बताए जा रहे हैं। यह जानकारी खुद एसटीसी की ओर से दी गई है, हालांकि सऊदी अरब ने इन हमलों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मुकाला, जो यमन के हद्रामौत प्रांत का एक अहम बंदरगाह शहर है, पिछले कुछ महीनों से रणनीतिक और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। एसटीसी के अनुसार, सऊदी लड़ाकू विमानों ने मुकाला के पश्चिम में स्थित बरशीद ब्रिगेड के सैन्य शिविर को निशाना बनाया। यह वही इलाका है, जिस पर हाल ही में एसटीसी ने नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया था। एसटीसी के एआईसी उपग्रह समाचार चैनल ने भी इन हमलों की पुष्टि की है।

यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब सऊदी अरब और एसटीसी के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों में सऊदी अरब द्वारा एसटीसी के ठिकानों पर की गई यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अलगाववादियों पर बमबारी की थी और उन हथियारों की खेप को निशाना बनाने का दावा किया था, जो कथित तौर पर एसटीसी को भेजी जा रही थीं। इन हथियारों को लेकर आरोप है कि उन्हें संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन हासिल है।

यमन का यह संघर्ष इसलिए भी बेहद पेचीदा है क्योंकि यहां एक ही समय में कई मोर्चे खुले हुए हैं। एक तरफ उत्तर यमन के बड़े हिस्से पर हूती विद्रोही काबिज़ हैं, जिन्हें ईरान समर्थित माना जाता है। दूसरी तरफ दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार है, जिसे सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन समर्थन देता है। लेकिन इसी गठबंधन का एक अहम सदस्य संयुक्त अरब अमीरात दक्षिण यमन में सक्रिय एसटीसी का खुलकर समर्थन करता है, जो यमन को दोबारा उत्तर और दक्षिण में विभाजित करने की मांग कर रहा है।

यही विरोधाभास इस पूरे संघर्ष को और अधिक उलझा देता है। सऊदी अरब की प्राथमिकता यमन की क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखना और हूती विद्रोहियों को सत्ता से दूर रखना रही है, जबकि यूएई का झुकाव दक्षिणी यमन में अपने प्रभाव को मजबूत करने और एसटीसी जैसे संगठनों को समर्थन देने की ओर देखा जाता है। नतीजतन, जो गठबंधन हूतियों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ा, वही गठबंधन अब दक्षिण यमन में एक-दूसरे के आमने-सामने खड़ा नजर आ रहा है।

मुकाला और हद्रामौत प्रांत का महत्व सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय भी है। यह इलाका अरब सागर से सटा हुआ है और यहां के बंदरगाहों का इस्तेमाल व्यापार, तेल आपूर्ति और रणनीतिक आवाजाही के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में एसटीसी का यहां नियंत्रण स्थापित करना सऊदी अरब के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि हालिया हवाई हमलों को दक्षिण यमन में सऊदी रणनीति के नए चरण के तौर पर देखा जा रहा है।

यमन बीते एक दशक से भी अधिक समय से युद्ध की आग में झुलस रहा है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, हजारों की जान जा चुकी है और देश दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां बार-बार चेतावनी दे चुकी हैं कि यमन में हालात किसी भी समय पूरी तरह बेकाबू हो सकते हैं। इसके बावजूद क्षेत्रीय शक्तियों के बीच चल रही खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है।

सऊदी अरब द्वारा किए गए ताजा हवाई हमले इस बात का संकेत हैं कि दक्षिण यमन अब सिर्फ हूती बनाम सरकार की लड़ाई का मैदान नहीं रह गया है, बल्कि यह सऊदी अरब और यूएई समर्थित ताकतों के बीच प्रभाव की जंग का केंद्र बन चुका है। यह जंग न केवल यमन के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि पूरे अरब क्षेत्र की स्थिरता पर भी इसका असर पड़ सकता है।

फिलहाल, सऊदी अरब की ओर से चुप्पी साधे रखना कई सवाल खड़े करता है। क्या ये हमले सीमित और चेतावनी भर हैं, या फिर दक्षिण यमन में एक बड़े सैन्य अभियान की भूमिका? क्या गठबंधन की अंदरूनी दरारें और गहरी होंगी? और सबसे अहम सवाल—इस सबकी कीमत यमन की आम जनता को और कितनी चुकानी पड़ेगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही सामने आएंगे, लेकिन इतना तय है कि मुकाला पर हुए ये हवाई हमले यमन युद्ध के एक नए और खतरनाक अध्याय की ओर इशारा कर रहे हैं।