वाशिंगटन
रूस ने ईरान को संवेदनशील जानकारी प्रदान की है, जिससे तेहरान को क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और अन्य सैन्य संपत्तियों पर संभावित हमले करने में मदद मिल सकती है। यह जानकारी दो अमेरिकी अधिकारियों ने एपी न्यूज को दी, जिन्होंने सुरक्षा कारणों से अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर यह विवरण साझा किया।
अधिकारियों के अनुसार, अभी तक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास यह स्पष्ट नहीं है कि रूस ने ईरान को दी गई जानकारी के उपयोग को लेकर क्या निर्देश या दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, उनके मुताबिक, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि रूस ईरान को उस सैन्य टकराव में शामिल करने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इज़राइल ने एक सप्ताह पहले ईरान के खिलाफ शुरू किया था।
रूस और ईरान के बीच दोस्ताना और रणनीतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने कई बार ऊर्जा, रक्षा और भू-राजनीतिक मामलों में सहयोग किया है। सूत्रों का कहना है कि रूस की यह पहल ईरान के क्षेत्रीय आक्रामक प्रयासों को बढ़ावा देने और अमेरिका तथा उसके सहयोगियों पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि अमेरिकी खुफिया समुदाय इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और ईरान द्वारा किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए अपने क्षेत्रीय संसाधनों को तैनात कर रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने इस सिलसिले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया कि अमेरिका किसी भी तरह की चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस द्वारा ईरान को दी गई जानकारी केवल सैन्य उपकरणों और रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अमेरिकी सेना की तैनाती, परिचालन और संभावित कमजोरियों के बारे में संवेदनशील जानकारी शामिल हो सकती है। यह कदम वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है और मध्य पूर्व में अमेरिकी सहयोगियों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए कि अमेरिका रूस की गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रहा है और दोनों देशों के बीच संभावित तनाव बढ़ सकता है। इस बीच, ईरान की प्रतिक्रिया और उसके अगले कदम पर पूरे विश्व की नजरें टिकी हैं।
रूस-ईरान संबंध, अमेरिकी सुरक्षा चिंताओं और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सैन्य रणनीति के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति बिगड़ी, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकती है।