ईरान में उग्र होते विरोध प्रदर्शन: खामेनेई बोले,‘दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 04-01-2026
Protests intensify in Iran: Khamenei says,
Protests intensify in Iran: Khamenei says, "The rioters must be shown their place."

 

दुबई

ईरान में बीते एक सप्ताह से जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने शनिवार को सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी।” उनके इस बयान को सुरक्षा बलों को आंदोलनों को बलपूर्वक दबाने की खुली छूट के रूप में देखा जा रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, खराब होती अर्थव्यवस्था के खिलाफ शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है।

86 वर्षीय खामेनेई की यह पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब देशभर में अशांति थमने का नाम नहीं ले रही। हालात 2022 के बाद सबसे गंभीर माने जा रहे हैं, जब पुलिस हिरासत में महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में व्यापक आंदोलन भड़क उठे थे। हालांकि मौजूदा विरोध अभी उतने व्यापक और तीव्र नहीं हैं, फिर भी इन्हें 2022 के बाद सबसे बड़ा जनआंदोलन बताया जा रहा है।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि यदि तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की “हिंसक हत्या” करता है तो अमेरिका “उनकी मदद को आएगा।” ट्रम्प के इस बयान पर ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और अधिकारियों ने पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी। ट्रम्प के शनिवार को दिए उस बयान के बाद इस चेतावनी को और महत्व मिला, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया है—जो ईरान के पुराने सहयोगी माने जाते हैं।

खामेनेई का सख्त संदेश

ईरानी सरकारी टीवी पर प्रसारित भाषण में खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों और “दंगाइयों” के बीच फर्क करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “हम प्रदर्शनकारियों से बात करते हैं, अधिकारियों को उनसे बात करनी चाहिए। लेकिन दंगाइयों से बात करने का कोई लाभ नहीं। दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी।”
उन्होंने बिना किसी सबूत के एक बार फिर आरोप लगाया कि इन आंदोलनों के पीछे अमेरिका और इजरायल जैसी विदेशी ताकतों का हाथ है। खामेनेई ने ईरानी मुद्रा रियाल के पतन के लिए भी “दुश्मन” को जिम्मेदार ठहराया।

ईरान की अर्धसैनिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और उसकी स्वयंसेवी इकाई बसिज़ पहले भी 2009 के ग्रीन मूवमेंट और 2022 के प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबा चुकी है। गार्ड केवल खामेनेई को ही जवाबदेह है। माना जा रहा है कि देश के कट्टरपंथी धड़े और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर संवाद का रास्ता अपनाने के पक्ष में हैं।

बढ़ती हिंसा और मौतें

शनिवार तड़के हुई हिंसा में दो नई मौतों की खबर सामने आई। धार्मिक शहर क़ुम में एक ग्रेनेड विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई। सरकारी अख़बार ईरान के अनुसार, सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि वह व्यक्ति लोगों पर हमला करने के लिए ग्रेनेड ले जा रहा था। सोशल मीडिया पर क़ुम की सड़कों पर आगजनी के कथित वीडियो भी सामने आए हैं।

दूसरी मौत पश्चिमी ईरान के केरमानशाह प्रांत के हारसिन शहर में हुई, जहां बसिज़ का एक सदस्य गोली और चाकू से किए गए हमले में मारा गया।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, विरोध प्रदर्शन ईरान के 31 में से 25 प्रांतों के 170 से अधिक इलाकों तक फैल चुके हैं। एजेंसी ने कम से कम 15 मौतों और 580 से अधिक गिरफ्तारियों की पुष्टि की है।

कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ और ओस्लो स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने इलाम प्रांत में हुई हिंसा में चार लोगों की मौत का दावा किया है और सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आरोप लगाया है। वहीं, अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने बिना सबूत यह आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी हथियार और ग्रेनेड लेकर चल रहे थे।

आर्थिक संकट और राजनीतिक तनाव

आर्थिक बदहाली से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब ईरान की धार्मिक सत्ता के खिलाफ नारे भी सुनाई दे रहे हैं। जून में इजरायल के साथ हुए युद्ध और उस दौरान अमेरिकी हमलों के बाद से ईरान की अर्थव्यवस्था और कमजोर हुई है।
ईरान ने हाल ही में यह घोषणा की कि उसने देश में कहीं भी यूरेनियम संवर्धन बंद कर दिया है, ताकि पश्चिम के साथ परमाणु कार्यक्रम पर संभावित बातचीत का संकेत दिया जा सके। हालांकि, अब तक ऐसी कोई वार्ता शुरू नहीं हो सकी है। ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दोनों ही ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू न करे।

विश्लेषकों का मानना है कि भले ही विरोध प्रदर्शन और तेज हों, लेकिन ईरानी शासन के पास इतना बड़ा सुरक्षा तंत्र है कि वह असंतोष को दबाकर सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रख सकता है।