तेहरान
ईरान में मानवाधिकारों की मुखर आवाज़ और नरगिस मोहम्मदी को एक बार फिर सख़्त सज़ा का सामना करना पड़ा है। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मोहम्मदी को ईरान की एक अदालत ने छह साल की जेल की सज़ा सुनाई है। उनके वकील मुस्तफा नीली ने रविवार को समाचार एजेंसी एएफपी को इसकी पुष्टि की।
वकील के मुताबिक, अदालत ने मोहम्मदी को “अपराध करने के उद्देश्य से सभा आयोजित करने और साज़िश रचने” के आरोपों में दोषी ठहराया। इसके साथ ही, उन्हें दो वर्षों के लिए देश छोड़ने पर प्रतिबंध भी लगाया गया है। सज़ा यहीं तक सीमित नहीं है—अदालत ने “दुष्प्रचार फैलाने” के आरोप में डेढ़ साल की अतिरिक्त कैद भी सुनाई है।
इसके अलावा, ईरानी न्यायालय ने नरगिस मोहम्मदी को देश के पूर्वी दक्षिण खोरासान प्रांत के शहर खोसफ में दो वर्षों के लिए निर्वासित करने का आदेश दिया है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह फ़ैसला असहमति की आवाज़ों को दबाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
नरगिस मोहम्मदी को वर्ष 2023 में मानवाधिकारों के क्षेत्र में उनके साहसिक और निरंतर संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 53 वर्षीय मोहम्मदी पिछले ढाई दशकों से ईरान में मृत्युदंड के प्रयोग और महिलाओं पर थोपे गए अनिवार्य ड्रेस कोड के ख़िलाफ़ मुखर रही हैं। इसी कारण उन्हें बार-बार गिरफ़्तारी, मुक़दमों और कारावास का सामना करना पड़ा है।
पिछले दशक का अधिकांश समय उन्होंने जेल में बिताया है। 2015 से पेरिस में रह रहे अपने जुड़वा बच्चों से वे अब तक मिल नहीं पाई हैं—यह तथ्य उनके संघर्ष की मानवीय कीमत को और गहराई से रेखांकित करता है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों का कहना है कि मोहम्मदी की सज़ा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिला अधिकारों पर ईरान की कठोर नीति को उजागर करती है।
इस फ़ैसले के बाद वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज़ हो गई हैं। कई संगठनों ने ईरान से मोहम्मदी की तत्काल रिहाई की मांग की है और कहा है कि शांतिपूर्ण मानवाधिकार गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में रखना अंतरराष्ट्रीय मानकों के ख़िलाफ़ है।
नरगिस मोहम्मदी का मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि क्या असहमति और मानवाधिकारों की पैरवी करने वालों के लिए ईरान में कोई सुरक्षित स्थान है। उनके समर्थकों का कहना है कि सज़ाएं आवाज़ों को खामोश कर सकती हैं, लेकिन संघर्ष की भावना को नहीं।





