ढाका
बांग्लादेश में सोमवार तड़के हल्की तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.3 मापी गई। यह झटका भारतीय समयानुसार सुबह 4 बजकर 50 मिनट पर आया और इसका केंद्र 45 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।
एनसीएस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भूकंप का केंद्र अक्षांश 25.08 उत्तर और देशांतर 92.03 पूर्व में दर्ज किया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, इस भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी 1 फरवरी 2026 को बांग्लादेश में 3.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। लगातार हल्के झटकों के चलते भूकंपीय गतिविधियों को लेकर एक बार फिर विशेषज्ञों की चिंताएं सामने आई हैं। हाल के महीनों में आए भूकंपों के बाद विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश भौगोलिक दृष्टि से एक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और यहां बड़े भूकंप का खतरा बना रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश तीन सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों—भारतीय, यूरेशियन और बर्मा प्लेट—के जंक्शन पर स्थित है। भारतीय प्लेट हर साल लगभग 6 सेंटीमीटर की रफ्तार से उत्तर-पूर्व दिशा में खिसक रही है, जबकि यूरेशियन प्लेट लगभग 2 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की गति से उत्तर की ओर बढ़ रही है। इन प्लेटों की निरंतर गति क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों को जन्म देती है।
देश के आसपास कई प्रमुख फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं, जिनमें बोगुड़ा फॉल्ट, त्रिपुरा फॉल्ट, शिलांग पठार, दौकी फॉल्ट और असम फॉल्ट शामिल हैं। इन्हीं कारणों से बांग्लादेश को 13 भूकंप-प्रवण क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। चट्टोग्राम, चट्टोग्राम हिल ट्रैक्ट्स और सिलहट के जैंतियापुर जैसे इलाके सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में आते हैं।
राजधानी ढाका की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक मानी जाती है। प्रति वर्ग किलोमीटर 30,000 से अधिक आबादी के साथ ढाका दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में शामिल है और इसे विश्व के 20 सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील शहरों में गिना जाता है।
हालांकि मौजूदा भूकंप से किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा प्रबंधन की तैयारी, जन-जागरूकता और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए बेहद जरूरी है। सरकार और संबंधित एजेंसियों से भूकंप-रोधी ढांचे और आपातकालीन योजनाओं को और मजबूत करने की लगातार अपील की जा रही है।




