शादी में शाही ठाठ, समाज में इंसाफ़ नदारद: मौलाना सज्जाद नोमानी का तीखा बयान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 31-01-2026
The truth about expensive weddings: ostentation versus social justice
The truth about expensive weddings: ostentation versus social justice

 

आवाज द वॉइस/ नई दिल्ली

भारत में शादी समारोहों में होने वाले खर्च और शाही दिखावे को लेकर सामाजिक और धार्मिक संगठनों की चिंता लगातार बढ़ रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित कई मुस्लिम संगठन “आसान शादी” और “सिंपल शादी” के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि समाज में लोग समझें कि शादियों में जरूरत से ज्यादा खर्च और दिखावा केवल सामाजिक दबाव बढ़ाता है, बल्कि वास्तविक मूल्य और नैतिकता को कम कर देता है। बावजूद इसके, महंगी शादियों का ट्रेंड कम होने का नाम नहीं ले रहा।

हाल ही में हैदराबाद में एक अत्यंत भव्य और महंगी शादी की खबर ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। इस घटना पर मशहूर धार्मिक विद्वान और समाज सुधारक मौलाना सज्जाद नोमानी ने तीखा बयान दिया और इसे देश में व्याप्त नैतिक पतन का प्रतीक बताया। मौलाना ने इस शादी के माध्यम से समाज में पैसे के गलत इस्तेमाल और असमानता की गंभीर समस्या को उजागर किया।
 
 
मौलाना सज्जाद नोमानी के अनुसार, यह शादी इतनी भव्य थी कि उसमें लगभग सोलह करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस खर्च में सजावट, दीयों की रोशनी, न्योते, संगीत और तमाम आकर्षक दिखावे शामिल थे। मौलाना ने बताया कि यह शादी पूरी तरह भव्यता और दिखावे पर आधारित थी, जबकि उसी समाज का मूल उद्देश्य—इंसानियत और नैतिकता—पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
 
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस उद्योगपति ने अपनी बेटी की शादी पर करोड़ों रुपये खर्च किए, वही अपने खुद के मस्जिद के इमाम के प्रति अत्यंत कठोर और अन्यायपूर्ण व्यवहार करता रहा। उनके अनुसार, इमाम की पत्नी बीमार पड़ीं और इमाम को उनके इलाज के लिए एक सप्ताह की छुट्टी मिली। हालांकि मजबूरी के कारण इमाम चार-पाँच दिन देर से वापस लौटे, लेकिन उद्योगपति ने उनकी सैलरी से केवल 4,000 रुपये काट दिए।
 
मौलाना ने इस घटना को देश में नैतिक और सामाजिक असमानता का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि जब लोग अपने ही समाज और समुदाय के लिए न्याय नहीं करते, तो कोई भी समाज सच्चे अर्थों में विकसित नहीं हो सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि धन का गलत तरीके से इस्तेमाल केवल दिखावा और फिजूलखर्ची को बढ़ावा देता है, जबकि सही दिशा में निवेश समाज और देश को उन्नति की ओर ले जाता है।
 
मौलाना सज्जाद नोमानी ने आगे कहा कि समाज में वास्तविक सुधार केवल इबादत या धार्मिक अनुष्ठानों से नहीं आता, बल्कि इंसाफ, दया और नैतिक जिम्मेदारी से आता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर धन और संसाधनों का उपयोग सही दिशा में किया जाए, तो यह समाज को मजबूती देता है। लेकिन अगर धन केवल दिखावे और विलासिता में बर्बाद किया जाए, तो इसका नुकसान केवल समाज को नहीं बल्कि पूरे देश को होता है।
 
उन्होंने इस मुद्दे को सिर्फ व्यक्तिगत या एक शादी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक व्यापक सामाजिक संदेश के रूप में पेश किया। मौलाना ने कहा कि समाज में असमानता, अमीर और गरीब के बीच का अंतर, और मानवाधिकारों का उल्लंघन केवल दिखावे और भव्यता से बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब देश अपने नागरिकों के प्रति न्याय नहीं करेगा, तब न तो हिंसा और मॉब लिंचिंग रुकेगी, न ही कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
 
मौलाना ने कहा कि युवा वर्ग भी इस असमानता और अन्याय को देख रहा है। जब उन्हें अपने समाज में न्याय और समान अवसर नहीं मिलेगा, तो वे निराश और हताश हो जाएंगे। यही कारण है कि वर्तमान समय में वास्तविक सुधार और समाज में स्थायी परिवर्तन केवल सही नेतृत्व, न्यायप्रिय सोच और नैतिकता से ही संभव है।
 
इस पूरे मामले में मौलाना ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में सही दिशा में धन का उपयोग, शिक्षा और सामाजिक संवेदनशीलता के माध्यम से ही उन्नति संभव है। उन्होंने कहा कि केवल महंगे समारोह और दिखावे से समाज में कोई स्थायी बदलाव नहीं आता। उन्होंने आम उम्माह से अपील की कि वे भव्यता और पैसे के प्रदर्शन के चक्कर में नैतिक मूल्यों और इंसानियत को पीछे न छोड़ें।
 
 
मौलाना सज्जाद नोमानी का यह संदेश सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ कहा कि अगर धन का सही इस्तेमाल और इंसाफ सुनिश्चित नहीं किया गया, तो कोई भी धर्म या समाज वास्तविक रूप से प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने संसाधनों का उपयोग सही दिशा में करें, जरूरतमंदों की मदद करें और समाज में न्याय और समानता को बढ़ावा दें।
 
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समाज में इस तरह के महंगे विवाह और दिखावों के पीछे केवल सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावा नहीं है, बल्कि यह नैतिक पतन और असमानता को भी उजागर करता है। मौलाना सज्जाद नोमानी ने इस पूरे मामले के माध्यम से यही स्पष्ट किया कि असली धर्म, असली इबादत और असली समाज निर्माण न्याय, दया और इंसाफ में निहित है।
 
मौलाना ने अपने भाषण के माध्यम से उम्माह को चेताया कि केवल दिखावे और भव्यता पर ध्यान देने से देश या समाज मजबूत नहीं होता। समाज की वास्तविक ताकत इंसाफ, नैतिक मूल्यों और सही दिशा में किए गए कार्यों में है। यही संदेश उन्होंने हैदराबाद की इस महंगी शादी को लेकर आम मुस्लिम समुदाय और पूरे देश के सामने रखा।