सूरजकुंड 2026: भारत-मिस्र सांस्कृतिक दोस्ती का जीवंत मंच

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 31-01-2026
39th Surajkund International Crafts Fair 2026: A cultural arrival of Egypt in the lap of the Aravalli hills.
39th Surajkund International Crafts Fair 2026: A cultural arrival of Egypt in the lap of the Aravalli hills.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला 2026 में मिस्र को अपने ऑफिशियल पार्टनर देश के रूप में सम्मानित करते हुए एक नई ऊँचाई पर पहुँचेगा, जहाँ मेले के पूरे परिसर में मिस्र की प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। मिस्र की सभ्यता, जो अपने पिरामिड, फ़ाराओ, हाइरोग्लिफ़ और नील नदी की जीवनदायिनी संस्कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध है, यहाँ पारंपरिक शिल्प, कांच और मिट्टी के काम, लिनन वस्त्रों की बुनाई, फ़ाराओ शैली के आभूषण और “आँख” (Eye of Horus) जैसे प्रतीकों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रदर्शित होगी। इसके साथ ही मिस्री लोक संगीत, नृत्य, कला और कहानी कहने की परंपरा मेले में एक अलग ही रंग भर देगी, जिससे दर्शकों को मिस्र की प्राचीनता और आधुनिकता का अनूठा संगम अनुभव होगा।

39th Surajkund International Crafts Fair 2026: A world of culture unfolds in the lap of the Aravalli hills; Egypt is the official partner.

सूरजकुंड मेला: कला, संस्कृति और शिल्प का संगम

हर साल सूरजकुंड मेला देश-विदेश की पारंपरिक शिल्प कला, हस्तकला, लोक कला और संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत करता है। इस वर्ष भी, यह मेला शिल्प, हथकरघा और लोक-संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में अपनी पहचान बनाए रखेगा। कला प्रेमियों और सांस्कृतिक उत्साही के लिए यह एक अनूठा अनुभव होगा, जहां वे न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से शिल्पकला देख पाएंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शिल्पकला की विविधताएं और परंपराएं अनुभव कर सकेंगे।

मिस्र – पार्टनर देश

2026 के सूरजकुंड मेला में मिस्र को पार्टनर देश के रूप में चुना गया है। मिस्र की पारंपरिक कला जैसे पैपिरस आर्ट, मेटलवर्क, बीड ज्वेलरी और अन्य सांस्कृतिक कलाओं की प्रदर्शनी इस वर्ष के मेले में एक विशेष आकर्षण होगा। मिस्र का पवेलियन एक समृद्ध सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा, जिसमें पारंपरिक हस्तशिल्प, कला प्रदर्शन और मिस्र के स्वादिष्ट व्यंजनों का समावेश होगा। यह मेलासंस्कृति का अद्भुत संगम होगा, जो हर दर्शक को एक अलग और नया अनुभव देगा।

उत्तर प्रदेश और मेघालय – थीम स्टेट

हर साल सूरजकुंड मेला एक विशेष थीम स्टेट को प्रदर्शित करता है, और इस बार उत्तर प्रदेश और मेघालय को भारत की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाने के लिए चुना गया है। उत्तर प्रदेश अपनी धरोहर, शिल्प और कला के साथ मेले में भाग लेगा, जबकि मेघालय अपनी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति और शिल्पकला का प्रदर्शन करेगा। इन दोनों राज्यों का पवेलियन दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के विविध पहलुओं से परिचित कराएगा।

मेला परिसर की भव्य सजावट और तैयारी

हरियाणा पर्यटन विभाग इस मेले को भव्य और यादगार बनाने के लिए पूरी तरह से जुटा हुआ है। सूरजकुंड मेला परिसर को पारंपरिक स्थापत्य और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ सजाया जा रहा है। रंग-बिरंगी रोशनी और विशेष सजावट के माध्यम से मेला परिसर को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक शानदार और रोमांचक अनुभव मिल सके। परिसर में सुधार और रेनोवेशन कार्य के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए विशेष स्थानों की व्यवस्था की जा रही है।

मेले के दौरान क्या होगा खास?

  1. पारंपरिक शिल्प और हस्तकला – यहां पर आप विभिन्न राज्यों और देशों के शिल्पकारों से उनके कामकाजी शिल्प, कढ़ाई, ज्वेलरी, मिट्टी कला, और लकड़ी की कला देख सकते हैं।

  2. सांस्कृतिक प्रस्तुतियां – मेला मैदान में लोक, शास्त्रीय, सूफी, बॉलीवुड संगीत और हास्य प्रस्तुतियों से सजी सांस्कृतिक संध्याएं हर शाम को आयोजित की जाएंगी।

  3. विशेष व्यंजन – विभिन्न राज्य और देशों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। खासकर मिस्र के व्यंजन इस बार मेले का आकर्षण होंगे।

  4. शिल्प कार्यशालाएं – शिल्प और कला प्रेमियों के लिए विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिसमें वे पारंपरिक शिल्पकला सीख सकते हैं।

सूरजकुंड मेला 2026: समय और स्थान

आयोजन की अवधि: 31 जनवरी 2026 से 15 फरवरी 2026
समय: प्रतिदिन सुबह 10:00 – 10:30 बजे से शाम 7:00 – 8:30 बजे तक
स्थान: सूरजकुंड इंटरनेशनल क्राफ्ट्स मेला ग्राउंड, सूरजकुंड रोड, फरीदाबाद, हरियाणा – 121010

 

पहुंचने के साधन

  1. मेट्रो: मेला स्थल से लगभग 4-5 किलोमीटर दूर बदरपुर मेट्रो स्टेशन (वायलेट लाइन) स्थित है।

  2. स्थानीय परिवहन: बदरपुर मेट्रो स्टेशन से ऑटो, रिक्शा, टैक्सी, या ऐप कैब के जरिए मेला स्थल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  3. सड़क मार्ग: दिल्ली, गुड़गांव और फरीदाबाद से टैक्सी, निजी वाहन और बसों के माध्यम से मेला स्थल तक पहुंचा जा सकता है।

  4. बस सेवाएं: ISBT, गुड़गांव, फरीदाबाद और प्रमुख मेट्रो स्टेशनों से विशेष लोकल बस सेवाएं चलाई जाती हैं।

  5. हवाई मार्ग: सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (दिल्ली) है, जो सूरजकुंड से लगभग 25-30 किलोमीटर दूर स्थित है।

एक वैश्विक सांस्कृतिक अनुभव

सूरजकुंड मेला 2026 एक ऐसा अवसर है, जब आप भारतीय और वैश्विक शिल्पकला, संस्कृति और परंपराओं का एक अद्भुत संगम देख सकते हैं। इस मेले में भाग लेकर आप न केवल पारंपरिक कला और शिल्प से रूबरू हो सकते हैं, बल्कि भारत और मिस्र जैसी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों का अनुभव भी ले सकते हैं। यह मेला एक मंच है, जो न केवल कला प्रेमियों के लिए, बल्कि हर किसी के लिए एक अनमोल सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव प्रदान करता है।

 

इस बार का मेला लोकल टू ग्लोबल की भावना को व्यक्त करेगा, जिसमें न केवल भारतीय पारंपरिक शिल्प की विविधता देखने को मिलेगी, बल्कि दुनियाभर की सांस्कृतिक रचनाओं और शिल्पकला का भी बेहतरीन प्रदर्शन किया जाएगा।

आइए, सूरजकुंड मेला 2026 में एक अनोखा सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त करें और इस भव्य उत्सव का हिस्सा बनें!