राजस्थान मदरसा बोर्ड की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले कय्यूम अख़्तर को जोधपुर में खिराजे अक़ीदत

Story by  प्रमोद जोशी | Published by  [email protected] • 3 Months ago
Qayyum Akhtar, who played a key role in the establishment of Rajasthan Madrasa Board, will be honored with Khiraze Aqeedat in Jodhpur.
Qayyum Akhtar, who played a key role in the establishment of Rajasthan Madrasa Board, will be honored with Khiraze Aqeedat in Jodhpur.

 

फरहान इसराइली / जोधपुर

 बुझावड़ स्थित मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर के सभागार में जयपुर की प्रसिद्ध सामाजिक शख़्सियत मरहूम (स्वर्गीय) एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख़्तर की याद में खिराजे अक़ीदत (शोक सभा) का आयोजन रखा गया.यूनिवर्सिटी के चेयरपर्सन मोहम्मद अतीक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि राजस्थान में कय्यूम अख़्तर आम आदमी के दर्द को समझने वाले और तालीम के जरिये लोगों को उन्नति का सपना दिखाने वाली शख़्सियत थे.

 मौलाना आज़ाद यूनिवर्सिटी की स्थापना से लेकर वर्तमान तक की तरक्क़ी में उनका अहम योगदान रहा. वे वक्फ बोर्ड ऑफ राजस्थान के चेयरमैन, राजस्थान में मिल्ली कौंसिल के संस्थापक व जीवन भर कौंसिल के जनरल सेक्रेटरी रहे. राजस्थान मदरसा बोर्ड की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाने, टाड़ा कानून को हटवाने तथा इस कानून से जुड़े बंदियों को रिहा करवाने में इनकी खास भूमिका रही.
 
यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेन्ट डॉ. जमील काज़मी ने बताया कि जयपुर में बच्चे-बच्चियों की बेहतर तालीम के लिए राज्य सरकार के विशेष सहयोग से रहमानिया मॉडल स्कूल की स्थापना करना, मदरसा बोर्ड में पेराटीचर्स की नियुक्ति में मुख्य भूमिका निभाना, आल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मशावरत व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड राजस्थान के मेम्बर सहित मरहूम कय्यूम अख़्तर प्रदेश व देश की कई सामाजिक, शैक्षिक व कल्याणकारी संस्थाओं में मुस्लिम लीडरशिप के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे.
 
यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अमीन ने कहा कि वंचित तबके के छात्र-छात्राओं विशेषकर छात्राओं की शिक्षा के लिए इन्होंने पूरा जीवन समर्पित किया. यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अब्दुल्लाह खालिद ने कहा कि इनका जाना न सिर्फ हमारे समाज के लिए अपितु प्रदेश के शैक्षिक वर्ग के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। इनके कार्य जीवन भर याद रखे जायेंगे.
 
यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक डॉ. इमरान खान पठान ने बताया कि उनकी याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया. शोक सभा में कला संकाय डीन डॉ. इनाम इलाही, वाणिज्य संकाय डीन डॉ. निरंजन बोहरा, एमबीए डीन डॉ दीपक भण्डारी, डॉ रईस, डॉ रंजीत, मोहम्मद शाहिद, भावेश दाधीच, नारायण दास वैष्णव, अफसीन सहित कई शिक्षक गण एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रही। तिलावते कुरान छात्र मुसब ने पढी. संचालन डिप्टी रजिस्ट्रार मोहम्मद अमीन ने किया.