The Force Behind the Medals: The Story of the Coaches Who Molded Indian Athletes into Commonwealth Games Champions
ग्लासगो (स्कॉटलैंड)।
राष्ट्रमंडल खेल 2026 (कॉमनवेल्थ गेम्स) में भारतीय खिलाड़ी लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक जीत रहे हैं और नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। जब कोई खिलाड़ी पोडियम पर तिरंगा लहराता है, तो सुर्खियां उसी के नाम होती हैं। लेकिन हर पदक और हर रिकॉर्ड के पीछे एक ऐसी टीम होती है, जो कैमरों की रोशनी से दूर रहकर वर्षों तक अथक मेहनत करती है। इस टीम के सबसे अहम सदस्य होते हैं खिलाड़ी के कोच और सहयोगी स्टाफ, जिनकी रणनीति, मार्गदर्शन और निरंतर समर्थन खिलाड़ियों को बड़े मंच पर सफलता दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की ओर से जारी बयान के अनुसार, ग्लासगो में भारत ने पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक जीतकर और वेटलिफ्टिंग में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन के साथ अपने अभियान की शानदार शुरुआत की है। इन उपलब्धियों के पीछे केवल खिलाड़ियों की मेहनत ही नहीं, बल्कि उनके कोचों की वर्षों की योजना, प्रशिक्षण और समर्पण भी शामिल है।
किसी बहु-खेल प्रतियोगिता में कोच की भूमिका केवल तकनीकी प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहती। उनका हर दिन खिलाड़ियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम, रिकवरी प्लान और फिटनेस की निगरानी से शुरू होता है। इसके बाद रणनीति तैयार करना, वीडियो विश्लेषण करना और खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत बातचीत के जरिए उनका आत्मविश्वास बनाए रखना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होता है। दबाव भरे मुकाबलों में खिलाड़ी मानसिक रूप से मजबूत रहें, इसके लिए कोच एक शिक्षक, मार्गदर्शक, मनोवैज्ञानिक और रणनीतिकार की भूमिका एक साथ निभाते हैं।
भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष और महान धाविका पी.टी. उषा ने कहा कि किसी भी सफल खेल अभियान की सबसे मजबूत नींव उसके कोच होते हैं। उन्होंने कहा, "एक खिलाड़ी के रूप में मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हर महान प्रदर्शन के पीछे एक महान कोच होता है। कोच वर्षों तक प्रतिभा को निखारने, खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें करियर के सबसे महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए तैयार करने में अपना पूरा जीवन लगा देते हैं। वे भले ही पोडियम पर नजर नहीं आते, लेकिन भारत के हर पदक पर उनके समर्पण और त्याग की छाप होती है। भारतीय ओलंपिक संघ उनके योगदान का सम्मान करता है और खिलाड़ियों को सर्वोत्तम कोचिंग सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।"
भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की सफलता ने एक बार फिर खिलाड़ी और कोच के मजबूत रिश्ते की अहमियत को साबित किया है। अनुभवी कोच विजय शर्मा, जिन्होंने ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू के साथ लंबे समय तक काम किया है, भारत के सबसे सम्मानित हाई-परफॉर्मेंस कोचों में गिने जाते हैं। उनकी तकनीकी समझ, प्रशिक्षण पद्धति और खिलाड़ियों को मानसिक रूप से तैयार करने की क्षमता ने भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विजय शर्मा के साथ-साथ सहायक कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ और अन्य सहयोगी स्टाफ भी खिलाड़ियों की सफलता में समान रूप से योगदान देते हैं। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक फिटनेस बनाए रखना, चोटों से बचाव करना, मानसिक दबाव को कम करना और सही समय पर सही रणनीति अपनाने में यही टीम महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राष्ट्रमंडल खेलों में जब कोई भारतीय खिलाड़ी पदक जीतकर देश का नाम रोशन करता है, तो उसके पीछे केवल व्यक्तिगत प्रतिभा नहीं होती, बल्कि वर्षों की सामूहिक मेहनत, अनुशासन और समर्पण की कहानी छिपी होती है। खिलाड़ी जहां देश के लिए पदक जीतते हैं, वहीं उनके कोच और सहयोगी स्टाफ उस सफलता की मजबूत नींव तैयार करते हैं। यही कारण है कि भारतीय खेलों की बढ़ती सफलता में इन अनदेखे नायकों का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पोडियम पर खड़े खिलाड़ियों का।