आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग में स्पिन गेंदबाज गेंद को टर्न कराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने कम उम्र से ही यह हुनर नहीं सीखा है और टूर्नामेंट के दौरान इस कला को सीखना मुमकिन नहीं है।
मुरलीधरन ने कहा कि आजकल स्पिन गेंदबाज गेंद को टर्न कराने और बल्लेबाजों को सोचने पर मजबूर करने की कला नहीं सीखते क्योंकि उनका ध्यान सिर्फ विविधता के जरिए रन रोकने पर रहता है।
मुंबई इंडियन्स के खिलाफ बुधवार को सनराइजर्स हैदराबाद की छह विकेट की जीत के बाद मुरलीधरन ने कहा, ‘‘घरेलू क्रिकेट में भी स्पिन गेंदबाजों के लिए हालात ऐसे ही रहे हैं। जब हम क्रिकेट खेलते थे तो एक स्पिनर के तौर पर आपको गेंद को टर्न कराना होता था, यही आपका पहला मकसद होता था। आजकल यह मुख्य बात नहीं रही क्योंकि हर कोई टेस्ट क्रिकेट खेलने के बारे में नहीं सोच रहा है। वे वनडे क्रिकेट खेलने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कम उम्र में भी वे सिर्फ तेज गेंदबाजी करने और गेंद में विविधता लाने की कोशिश करते हैं, उसे टर्न कराने की नहीं। क्योंकि उन्हें कम उम्र में यह काबिलियत नहीं मिली होती इसलिए वे 18 या 19 साल की उम्र में आकर गेंद को टर्न कराने की कोशिश नहीं कर सकते क्योंकि उनकी ‘मसल मेमोरी’ (शारीरिक आदतें) पहले से ही वैसी बन चुकी होती हैं।’’
मुरलीधरन ने कहा, ‘‘जब आप 10, 11 या 12 साल के होते हैं तब गेंद को टर्न कराने की कोशिश करें। हमने इसी तरह सीखा था। बल्लेबाज को छकाने के लिए हमें गेंद को टर्न कराना जरूरी होता है।’’
मुरलीधरन ने कहा कि आईपीएल में स्पिनरों के खिलाफ बल्लेबाजी करना ‘थ्रो-डाउन विशेषज्ञों’ के खिलाफ अभ्यास करने जैसा है क्योंकि इसमें बस गेंद की लाइन में आकर उसे जोर से मारना होता है।