आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) मैच के दौरान क्रिकेटर रियान पराग द्वारा कथित तौर पर ‘वेप’ जैसे उपकरण का इस्तेमाल किए जाने का वीडियो सामने आने के बाद एक महिला संगठन ने बृहस्पतिवार को इसकी जांच की मांग की और सवाल उठाया कि क्या यह घटना प्रतिबंधित उत्पादों को सामान्य बनाने के प्रयास का हिस्सा थी।
वेप और ई-सिगरेट जैसे नए जमाने के निकोटीन युक्त उपकरणों के प्रचार का विरोध करने वाले महिला संगठन ‘मदर्स अगेंस्ट वेपिंग’ ने कहा कि इस घटना की गहन जांच किए जाने की आवश्यकता है।
घटना 28 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच हुए मैच के दौरान हुई। सीधे प्रसारण के दौरान रिकॉर्ड हुए वीडियो में 24 वर्षीय पराग ड्रेसिंग रूम के अंदर कथित तौर पर ‘वेप’ जैसे उपकरण का इस्तेमाल करते दिखते हैं।
बीसीसीआई के अधिकारियों ने राजस्थान रॉयल्स टीम के कप्तान से स्पष्टीकरण मांगा है। संगठन ने खिलाड़ी के खिलाफ अब तक कोई औपचारिक नोटिस जारी न किए जाने पर चिंता व्यक्त की है।
संगठन ने इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध है, जिसमें इसका उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन शामिल हैं।
संगठन ने कुछ खबरों में किए गए उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया है कि बंद क्षेत्र ‘वेपिंग’ करना ‘‘ग्रे जोन’’ में आता है। इसने ऐसे दावों को ‘‘गलत जानकारी’’ करार दिया।
संगठन ने अपने बयान में कहा, ‘‘केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी रूप में या मात्रा में ई-सिगरेट रखना कानून का उल्लंघन है। कानून में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उल्लंघन करने पर छह महीने तक की कैद या 50,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, जबकि प्रतिबंध का व्यापक उल्लंघन करने पर एक साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं, तथा बार-बार अपराध करने पर सजा और भी कड़ी हो सकती है।’’