Ranji Trophy hero now in IPL: Delhi Capitals have high hopes from Aqib Nabi Dar
आवाज द वॉयस,/नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट में हर कुछ वर्षों में कोई नया नाम उभरता है। ऐसा नाम जो अपने प्रदर्शन से अचानक सबका ध्यान खींच लेता है। इस बार यह नाम है आकिब नबी डार। जम्मू कश्मीर के इस तेज गेंदबाज ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी में ऐसा प्रदर्शन किया कि क्रिकेट जगत को एक नई रफ्तार दिखाई दी। दस मैचों में साठ विकेट। औसत सिर्फ बारह के आसपास। सात बार पांच विकेट। एक बार सात विकेट। यह आंकड़े सिर्फ अच्छे नहीं हैं। यह किसी गेंदबाज के पूरे वर्चस्व की कहानी कहते हैं।
आकिब नबी डार की सबसे बड़ी पहचान यह है कि उन्होंने केवल विकेट नहीं लिए बल्कि अपनी टीम को इतिहास भी दिलाया। जम्मू कश्मीर को पहली बार रणजी चैंपियन बनाने में उनकी भूमिका बेहद अहम रही। एक ऐसी टीम जो लंबे समय तक भारतीय घरेलू क्रिकेट में संघर्ष करती रही, वह अचानक चैंपियन बन गई। इस जीत में आकिब की गेंदबाजी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई।
अब यही गेंदबाज इंडियन प्रीमियर लीग में नई चुनौती के लिए तैयार है। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स ने उन पर भरोसा जताया है। टीम को उम्मीद है कि रणजी में जिस जुनून और मेहनत के साथ उन्होंने गेंदबाजी की, वही ऊर्जा टी ट्वेंटी क्रिकेट में भी दिखाई देगी।
दिल्ली कैपिटल्स के मुख्य कोच हेमंग बदानी आकिब को लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि टीम ने आकिब की प्रतिभा बहुत पहले पहचान ली थी। जब दूसरे लोग उन्हें ज्यादा नहीं जानते थे तब भी दिल्ली कैपिटल्स की नजर उन पर थी। बदानी बताते हैं कि टीम कैंप में जब पहली बार आकिब को देखा गया तो साफ महसूस हुआ कि इस लड़के में कुछ खास है। तेज रफ्तार, लंबा स्पैल डालने की क्षमता और लगातार मेहनत करने का जज्बा।
दरअसल आकिब नबी डार की असली ताकत सिर्फ उनकी गति नहीं है। उनकी असली ताकत है उनका रवैया। आज के समय में कई युवा गेंदबाज चार दिन वाले क्रिकेट से बचते हैं। लंबा स्पैल डालना आसान नहीं होता। शरीर पर दबाव पड़ता है। लेकिन आकिब इसके उलट हैं। उन्हें रणजी क्रिकेट खेलना पसंद है। वे लंबा स्पैल डालने से नहीं घबराते। बार बार दौड़ कर गेंदबाजी करना उन्हें थकाता नहीं बल्कि और ऊर्जा देता है।
यही कारण है कि रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट मुकाबलों में उन्होंने अपनी टीम को बार बार जीत दिलाई। मध्य प्रदेश के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उन्होंने बारह विकेट लिए। सात विकेट की शानदार पारी भी इसमें शामिल थी। यह प्रदर्शन इतना प्रभावशाली था कि उन्हें मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।
सेमीफाइनल में भी कहानी लगभग वही रही। बंगाल के खिलाफ उन्होंने नौ विकेट लिए। एक बार फिर पांच विकेट का स्पैल। गेंद के साथ साथ बल्ले से भी योगदान दिया। बयालीस रन की उपयोगी पारी खेली। यह दिखाता है कि वे केवल गेंदबाज ही नहीं बल्कि टीम खिलाड़ी भी हैं। जरूरत पड़ने पर बल्लेबाजी से भी मदद कर सकते हैं।
रणजी ट्रॉफी में उनके पूरे अभियान को देखें तो यह एक लगातार मेहनत करने वाले खिलाड़ी की कहानी लगती है। दस मैचों में साठ विकेट लेना आसान नहीं होता। हर मैच में फोकस चाहिए। फिटनेस चाहिए। मानसिक मजबूती चाहिए। आकिब ने यह सब दिखाया। यही वजह है कि उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया।
दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह गेंदबाज इसलिए भी खास हो सकता है क्योंकि टीम के पास ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क भी हैं। युवा आकिब को स्टार्क जैसे अनुभवी गेंदबाज के साथ गेंदबाजी करने का मौका मिलेगा। यह अनुभव किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बेहद कीमती होता है। नेट्स में बातचीत। मैच के दौरान सलाह। दबाव में गेंद डालने की कला। यह सब सीखने का मौका मिलेगा।
हेमंग बदानी का मानना है कि आकिब में एक खास बात है। वे खुद को बचाकर नहीं खेलते। जब गेंदबाजी करते हैं तो पूरी ताकत लगा देते हैं। हर गेंद में दिल से मेहनत करते हैं। यही जुनून उन्हें अलग बनाता है। बदानी कहते हैं कि आज के समय में जब कई गेंदबाज लंबे फॉर्मेट से दूरी बनाते हैं, उस दौर में आकिब का चार दिन का क्रिकेट पसंद करना ताजगी भरा लगता है।
आकिब की कहानी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह संघर्ष की भी कहानी है। जम्मू कश्मीर से क्रिकेट में आगे बढ़ना आसान नहीं रहा है। लंबे समय तक वहां के खिलाड़ियों को सीमित मौके मिले। सुविधाएं भी उतनी विकसित नहीं थीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वहां से कई प्रतिभाएं सामने आई हैं। आकिब नबी डार उसी नई पीढ़ी का हिस्सा हैं जो यह साबित करना चाहती है कि प्रतिभा किसी भी क्षेत्र से आ सकती है।
उनकी गेंदबाजी में आक्रामकता है। लेकिन व्यक्तित्व में सादगी दिखाई देती है। टीम के साथी बताते हैं कि वे ज्यादा बातें नहीं करते। मैदान पर ध्यान रखते हैं। अभ्यास में समय देते हैं। लगातार मेहनत करते हैं। यही आदतें किसी खिलाड़ी को आगे ले जाती हैं।
दिल्ली कैपिटल्स के लिए आने वाला आईपीएल सीजन भी महत्वपूर्ण है। पिछले साल टीम प्लेऑफ से थोड़ा पीछे रह गई थी। शुरुआत अच्छी रही लेकिन अंत में टीम लय खो बैठी। इस बार टीम प्रबंधन उम्मीद कर रहा है कि नई ऊर्जा और नए खिलाड़ियों के साथ परिणाम बेहतर होंगे।
बैटिंग में टीम के पास केएल राहुल, ट्रिस्टन स्टब्स, डेविड मिलर और आशुतोष शर्मा जैसे खिलाड़ी हैं। लेकिन टी ट्वेंटी क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। खासकर नई गेंद और डेथ ओवर में। यही वह जगह है जहां आकिब नबी डार अपनी पहचान बना सकते हैं।
अगर वे रणजी जैसी लय आईपीएल में भी बनाए रखते हैं तो यह सीजन उनके करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। युवा खिलाड़ियों के लिए आईपीएल सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं होता। यह मंच होता है जहां से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का रास्ता खुलता है।
फिलहाल आकिब नबी डार के सामने नई चुनौती है। नई टीम। नया फॉर्मेट। नया दबाव। लेकिन जिस तरह उन्होंने घरेलू क्रिकेट में खुद को साबित किया है उससे उम्मीद बनती है कि वे इस चुनौती को भी अवसर में बदल सकते हैं।
कश्मीर की घाटी से निकली यह रफ्तार अब देश के सबसे बड़े क्रिकेट मंच पर दिखाई देने वाली है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस युवा गेंदबाज पर जरूर रहेंगी। क्योंकि कभी कभी कोई खिलाड़ी केवल विकेट नहीं लेता। वह एक नई कहानी लिखता है। और अभी लगता है कि आकिब नबी डार की कहानी की शुरुआत ही हुई है।