नई दिल्ली
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट ने वर्ष 2026 में एक नया इतिहास रच दिया है। इस साल रिकॉर्ड 1,008 पर्वतारोहियों ने सफलतापूर्वक एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। यह पहली बार है जब किसी एक वर्ष में इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर सफल आरोहण किया है।
नेपाल के प्रतिष्ठित समाचार पत्र काठमांडू पोस्ट ने नेपाल सरकार के पर्यटन विभाग के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वालों की संख्या ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इससे पहले सबसे अधिक सफल आरोहण का रिकॉर्ड वर्ष 2019 में बना था, जब 872 पर्वतारोही शिखर तक पहुंचने में सफल रहे थे।
समुद्र तल से 29,032 फीट की ऊंचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है। यह हिमालय पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है और नेपाल तथा चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा पर स्थित है। हालांकि पर्वतारोही दोनों ओर से चढ़ाई करते हैं, लेकिन अधिकतर लोग नेपाल वाले मार्ग को ही चुनते हैं, क्योंकि इसे अपेक्षाकृत अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित माना जाता है।
माउंट एवरेस्ट का नाम दुनिया के साहसिक अभियानों के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। वर्ष 1953 में न्यूजीलैंड के पर्वतारोही एडमंड हिलेरी और नेपाली शेरपा तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार सफलतापूर्वक एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचा था। उनकी इस उपलब्धि ने पूरी दुनिया के साहसिक यात्रियों और पर्वतारोहियों को प्रेरित किया। इसके बाद से हर वर्ष हजारों लोग इस चुनौतीपूर्ण अभियान का हिस्सा बनने के लिए नेपाल पहुंचते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल और मई ऐसे दो महीने हैं, जब एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल रहता है। शेष दस महीनों में अत्यधिक ठंड, तेज बर्फबारी और खतरनाक मौसम के कारण पर्वतारोहण लगभग असंभव हो जाता है। यही वजह है कि अधिकांश अभियान इसी सीमित समयावधि में संचालित किए जाते हैं।
हाल के वर्षों में नेपाल सरकार ने पर्वतारोहियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले प्रत्येक पर्वतारोही के लिए स्थानीय गाइड या शेरपा का साथ होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ी है बल्कि दुर्घटनाओं में भी कमी आई है।
पर्वतारोहण गाइडों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और इंटरनेट ने भी एवरेस्ट अभियान को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाया है। अब बेस कैंप और ऊंचाई वाले शिविरों से ही मौसम की सटीक जानकारी प्राप्त हो जाती है। इससे पर्वतारोही मौसम के अनुकूल समय चुनकर आगे बढ़ सकते हैं और जोखिम कम हो जाता है।
पर्यटन विभाग के महानिदेशक रामकृष्ण लामिछाने ने कहा कि 2026 का यह रिकॉर्ड नेपाल के पर्वतीय पर्यटन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उनका मानना है कि बेहतर प्रबंधन, आधुनिक तकनीक और अनुकूल मौसम ने इस ऐतिहासिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
माउंट एवरेस्ट पर दर्ज यह नया रिकॉर्ड एक बार फिर साबित करता है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी आज भी साहस, संकल्प और रोमांच का सबसे बड़ा प्रतीक बनी हुई है।