केकेआर से रिलीज़ होने पर बोले मुस्तफिज़ुर रहमान, मदन लाल ने उठाए बीसीसीआई के फैसले पर सवाल

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 04-01-2026
Mustafizur Rahman spoke out after being released by KKR, while Madan Lal questioned the BCCI's decision.
Mustafizur Rahman spoke out after being released by KKR, while Madan Lal questioned the BCCI's decision.

 

ढाका

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 से पहले मुस्तफिज़ुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) द्वारा रिलीज़ किए जाने का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस पूरे घटनाक्रम पर खुद बांग्लादेशी तेज़ गेंदबाज़ की प्रतिक्रिया सामने आई है। मुस्तफिज़ुर ने बांग्लादेशी मीडिया से बातचीत में इस फैसले को स्वीकार करते हुए कहा, “अगर आपको ड्रॉप कर दिया जाता है, तो आप और क्या कर सकते हैं?”

कोलकाता नाइट राइडर्स ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि मुस्तफिज़ुर रहमान को टीम से रिलीज़ करने का फैसला Board of Control for Cricket in India (बीसीसीआई) के निर्देशों के बाद सभी प्रक्रियाओं और सलाह-मशविरे के तहत लिया गया। बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया के अनुसार, फ्रेंचाइज़ी को स्पष्ट तौर पर निर्देश दिया गया था कि वह बांग्लादेशी गेंदबाज़ को अपने स्क्वाड से अलग करे।

गौरतलब है कि मुस्तफिज़ुर रहमान को दिसंबर 2025 में आईपीएल 2026 की नीलामी के दौरान केकेआर ने 9.20 करोड़ रुपये की बड़ी रकम में खरीदा था। वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे बांग्लादेशी खिलाड़ी बने थे। उनके रिलीज़ होने के पीछे बांग्लादेश में हालिया घटनाओं और भारत में उठे विरोध को अहम वजह बताया जा रहा है।

इस फैसले पर भारतीय क्रिकेट जगत से भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और पूर्व ऑलराउंडर मदन लाल ने इस पूरे मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। इंडिया टुडे से बातचीत में मदन लाल ने कहा कि बीसीसीआई का फैसला इतना मजबूत होता है कि उसे चुनौती देने की ताकत किसी के पास नहीं है, यहां तक कि केकेआर के मालिक शाहरुख़ ख़ान के पास भी नहीं।

मदन लाल ने सवाल उठाया कि आखिर खेल में इतनी राजनीति क्यों घुस आई है। उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वह दुखद है, लेकिन खिलाड़ियों को इसमें क्यों घसीटा जा रहा है? इसमें शाहरुख खान की क्या गलती है? नीलामी तो एक समिति करती है, खिलाड़ी वहीं से चुने जाते हैं।”

हालांकि, मदन लाल ने यह भी कहा कि देश की जनता की भावनाएं अक्सर फैसलों पर भारी पड़ती हैं। उनके मुताबिक, “देश सर्वोपरि है और करोड़ों लोगों की भावनाओं के दबाव में लिया गया यह फैसला शायद पूरी तरह गलत भी नहीं कहा जा सकता।”

कुल मिलाकर, मुस्तफिज़ुर रहमान का मामला अब सिर्फ़ एक खिलाड़ी की रिलीज़ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह खेल, राजनीति और जनभावनाओं के आपसी टकराव की बड़ी बहस का रूप ले चुका है।