मीराबाई चानू: संघर्ष से शिखर तक पहुंचने वाली भारत की ‘वेटलिफ्टिंग क्वीन’

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 29-07-2026
Mirabai Chanu: India's 'weightlifting queen' who reached the top through struggle
Mirabai Chanu: India's 'weightlifting queen' who reached the top through struggle

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

सैखोम मीराबाई चानू भारतीय खेल जगत की उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और असाधारण प्रतिभा के दम पर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया। मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर ओलंपिक पदक जीतने तक का उनका सफर संघर्ष, असफलताओं और शानदार वापसी की प्रेरणादायक कहानी है। वेटलिफ्टिंग जैसे कठिन खेल में उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीते और देश की नई पीढ़ी को इस खेल की ओर आकर्षित किया।
 
साधारण परिवार से शुरू हुआ सफर

मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के इम्फाल पूर्व जिले के नोंगपोक काकचिंग गांव में हुआ। उनका बचपन एक सामान्य परिवार में बीता, लेकिन छोटी उम्र से ही उनके अंदर असाधारण शारीरिक ताकत दिखाई देने लगी थी। कहा जाता है कि करीब 12 साल की उम्र में वह लकड़ियों का भारी गट्ठर आसानी से उठा लेती थीं, जिसे उठाना उनके बड़े भाई के लिए भी मुश्किल था। उनकी इसी प्राकृतिक ताकत ने परिवार और आसपास के लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
 
बचपन में मीराबाई ने टेलीविजन पर भारतीय वेटलिफ्टर कुंजुरानी देवी को देखा। कुंजुरानी देवी की उपलब्धियों से प्रेरित होकर मीराबाई ने भी वेटलिफ्टिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने कठिन प्रशिक्षण शुरू किया और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी।
 
शुरुआती सफलता और अंतरराष्ट्रीय पहचान

मीराबाई के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहला बड़ा पड़ाव 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में आया। उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद उनकी नजर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के लिए पदक जीतने पर थी।
 
2017 में मीराबाई ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हासिल की। अमेरिका के अनाहाइम में आयोजित विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में उन्होंने 48 किलोग्राम वर्ग में कुल 194 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत ने उन्हें विश्व स्तर पर एक मजबूत वेटलिफ्टर के रूप में स्थापित कर दिया और भारत को लंबे समय बाद विश्व चैंपियनशिप में बड़ी सफलता मिली।
 
ओलंपिक में ऐतिहासिक जीत

मीराबाई चानू के करियर का सबसे यादगार अध्याय टोक्यो ओलंपिक में लिखा गया। 2020 के ओलंपिक खेल कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में आयोजित हुए। महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई ने कुल 202 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया।
 
इस उपलब्धि के साथ वह ओलंपिक में भारोत्तोलन का पदक जीतने वाली भारत की चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गईं। उनकी जीत ने पूरे देश में उत्साह की लहर पैदा कर दी। टोक्यो में उनके प्रदर्शन ने भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई पहचान दी और लाखों युवाओं को इस खेल के प्रति प्रेरित किया।
 
ओलंपिक के बाद मीराबाई देश की सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में शामिल हो गईं। उनकी सफलता का असर केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मणिपुर और पूर्वोत्तर भारत के युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक नई उम्मीद पैदा की।
 
कॉमनवेल्थ में शानदार प्रदर्शन

मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया। 2018 के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने महिलाओं के 49 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने कुल 201 किलोग्राम वजन उठाकर भारत को इस प्रतियोगिता में भारोत्तोलन का पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
 
उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह केवल एक बड़ी प्रतियोगिता की खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर प्रदर्शन करने वाली एथलीट हैं।
 
रिकॉर्ड और उपलब्धियों का सफर

मीराबाई चानू ने अपने करियर में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं। विश्व चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर उनका प्रदर्शन भारतीय भारोत्तोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 2017 की विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण, टोक्यो ओलंपिक में रजत और कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार शानदार प्रदर्शन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं।
 
वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सबसे सफल महिला भारोत्तोलकों में से एक बन चुकी हैं। उनके प्रदर्शन ने भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह साबित किया कि छोटे शहर और गांव से आने वाला खिलाड़ी भी विश्व के सबसे बड़े खेल मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकता है।
 
सम्मान और पुरस्कार

मीराबाई चानू को खेलों में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया है। उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से भी नवाजा गया।
 
उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें मणिपुर पुलिस में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Addl. SP) का पद भी दिया गया। उनके लिए ये सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि मणिपुर और पूरे भारत के लिए गौरव का विषय हैं।
 
संघर्ष से मिली प्रेरणा

मीराबाई चानू की कहानी केवल पदक और रिकॉर्ड की कहानी नहीं है। यह असफलताओं से लड़ने और लगातार आगे बढ़ने की कहानी भी है। वेटलिफ्टिंग में चोट, दबाव और भारी वजन उठाने की चुनौती के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
 
एक छोटे से गांव की लड़की से ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन बनने तक का उनका सफर आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है। मीराबाई चानू ने साबित किया है कि प्रतिभा अगर कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ जुड़ जाए, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। उनकी कहानी भारतीय खेलों के इतिहास में हमेशा एक ऐसी प्रेरणादायक यात्रा के रूप में याद की जाएगी, जिसमें एक साधारण लड़की ने अपनी असाधारण ताकत से दुनिया के सामने भारत का तिरंगा ऊंचा किया।